Giridih : झारखंड सरकार एक ओर अवैध खनन के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत साठीबाद इलाके में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर उत्खनन जारी रहने के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार ताहिर अंसारी और उसके सहयोगी इरशाद आलम द्वारा लंबे समय से क्षेत्र में रात के अंधेरे में पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. आरोप है कि हर रात ब्लास्टिंग कर पत्थर निकाले जाते हैं और फिर हाइवा वाहनों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाते हैं. सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन करीब 40 हाइवा पत्थरों की निकासी हो रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है.
ग्रामीणों का कहना
ग्रामीणों का कहना है कि दिन में इलाका शांत दिखाई देता है, लेकिन रात होते ही विस्फोट और मशीनों की आवाज से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है. लोगों का आरोप है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग से आसपास के घरों में दरारें पड़ रही हैं और ग्रामीण भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र वन विभाग की भूमि के अंतर्गत आता है और वहां बिना वैध अनुमति के खनन हो रहा है, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? यदि जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? आखिर किसके संरक्षण में यह कथित अवैध कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है? सरकार बार-बार अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करती है. खनन विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन नियमित निगरानी के दावे भी करते हैं. इसके बावजूद यदि रातभर ब्लास्टिंग होती है, दर्जनों हाइवा पत्थर ढोते हैं और करोड़ों के राजस्व नुकसान की चर्चा होती है, तो यह व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है.
क्या सरकार अपने अवैध खनन विरोधी अभियान को साठीबाद तक पहुंचाएगी
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि बिना किसी प्रभावशाली संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं है. लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो क्षेत्र में ड्रोन सर्वे, संयुक्त छापेमारी और राजस्व हानि की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके. ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, वन विभाग और खनन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो न केवल पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचेगी, बल्कि सरकार के राजस्व को भी लगातार नुकसान होता रहेगा. अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं. सवाल यह है कि क्या सरकार अपने अवैध खनन विरोधी अभियान को साठीबाद तक पहुंचाएगी, या फिर कथित पत्थर माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा.
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