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जमशेदपुर: तिहरे हत्याकांड की रूह कंपा देने वाली इनसाइड स्टोरी

Jamshedpur: टाटा स्टील के पॉश इलाके एग्रिको में हुए दिल दहला देने वाले तिहरे हत्याकांड ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया...

Jamshedpur: टाटा स्टील के पॉश इलाके एग्रिको में हुए दिल दहला देने वाले तिहरे हत्याकांड ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है. क्वार्टर नंबर L4-11 के बंद कमरों के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसकी कल्पना मात्र से लोगों की रूह कांप जा रही है. इसी साल टाटा स्टील से सेवानिवृत्त हुए रविंद्र सिंह ने जिस क्रूरता के साथ अपनी पत्नी और दो बच्चों को कुल्हाड़ी और हथौड़े से मौत के घाट उतारा, उसने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

खून से सनी दीवारें और सीन रीक्रिएशन

सोमवार को जब एएसपी ऋषभ त्रिवेदी और सिदगोड़ा थाना प्रभारी फैज अकरम की मौजूदगी में फोरेंसिक टीम घर के भीतर दाखिल हुई, तो नजारा भयावह था. किचन से लेकर बेडरूम तक फर्श पर खून की नदियां बही थीं. पुलिस ने साक्ष्यों को जुटाने के लिए करीब पांच घंटे तक घटनास्थल की बारीकी से जांच की. जांच के दौरान पुलिस ने सीन रीक्रिएशन भी किया, ताकि यह समझा जा सके कि आरोपी ने किस तरह एक-एक कर तीनों पर हमला किया होगा.

पुलिस जांच के 5 बड़े सवाल: क्या यह सुनियोजित साजिश थी?

– आरोपी का कहना है कि विवाद नाश्ते के दौरान शुरू हुआ. पुलिस का सवाल है कि अगर विवाद अचानक हुआ, तो कुल्हाड़ी और हथौड़ा वहां पहले से कैसे मौजूद थे? क्या हत्या की साजिश पहले ही रची जा चुकी थी?

– फरवरी में टाटा स्टील से रिटायर होने के बाद रविंद्र के स्वभाव में आए बदलावों की पड़ताल हो रही है. क्या काम छूटने के बाद उपजी कुंठा और घर में रहने के तनाव ने उसे हिंसक बनाया?

– आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य के दावों को सत्यापित करने के लिए पुलिस उसके पिछले मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन खंगाल रही है.

– हत्या में इस्तेमाल हथियारों पर मिले फिंगरप्रिंट्स और खून के धब्बों का मिलान आरोपी के बयानों से किया जा रहा है.

– हत्या के बाद आरोपी ने गैस पाइप खोलकर और पर्दों में आग लगाकर खुदकुशी का जो नाटक किया, पुलिस उसे सजा से बचने का एक ‘पैंतरा’ मानकर भी देख रही है.

बाहर खुशहाली, भीतर कलह, परिवार की दोहरी जिंदगी

पड़ोसियों और जान-पहचान वालों के लिए यह यकीन करना नामुमकिन है. उनके अनुसार रविंद्र एक शांत व्यक्ति था. परिवार बाहर से बेहद सुखी दिखता था बेटी गुरुग्राम में और बेटा रायपुर में अच्छी नौकरी कर रहे थे. लेकिन परिजनों की मानें तो रिटायरमेंट के बाद घर के भीतर का माहौल बदल चुका था. छोटी-छोटी बातों पर होने वाली कहासुनी ने धीरे-धीरे एक भयंकर ज्वालामुखी का रूप ले लिया था.

मनोवैज्ञानिक एंगल: क्या रिटायरमेंट ने बनाया हत्यारा?

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद अचानक घर बैठने से व्यक्ति में रिटायरमेंट सिंड्रोम घर कर सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृति बढ़ सकती है. पुलिस अब इसी एंगल से जांच कर रही है कि क्या घरेलू कलह और मानसिक अकेलेपन ने रविंद्र के भीतर इतना गुस्सा भर दिया था कि उसने अपने ही हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया. आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है और पूछताछ जारी है. हम हर वैज्ञानिक साक्ष्य को बारीकी से देख रहे हैं, ताकि इस जघन्य अपराध की कड़ियां जोड़ी जा सकें.

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