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शुद्ध मतदाता सूची के लिए झारखंड में महाभियान : आज से 47 लाख मतदाताओं के सत्यापन के लिए घर-घर दस्तक देंगे BLO

Ranchi : लोकतंत्र के महापर्व की नींव उसकी मतदाता सूची होती है. इसे त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के संकल्प के साथ...

SIR अभियान

Ranchi : लोकतंत्र के महापर्व की नींव उसकी मतदाता सूची होती है. इसे त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के संकल्प के साथ झारखंड में मंगलवार से एक बड़े विशेष गहन पुनरीक्षण SIR अभियान का आगाज हो गया है. राज्य निर्वाचन आयोग ने इस अभियान को मतदाता सूची का शुद्धिकरण मिशन का नाम दिया है. जिसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर BLO अब सीधे मतदाताओं के द्वार तक पहुंचेंगे. यह कवायद केवल नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन 47 लाख से अधिक मतदाताओं की पहचान करने के लिए है, जिनकी मैपिंग अब तक नहीं हो सकी है.

चुनावी सुचिता की दिशा में बड़ा कदम

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य चुनावी डेटाबेस को आधुनिक और विश्वसनीय बनाना है. राज्य में कुल 2.64 करोड़ से अधिक मतदाता हैं. जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अभी भी सत्यापन की प्रक्रिया से बाहर है. 29 जुलाई तक चलने वाला यह अभियान मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि वाले और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए एक ‘फिल्टर’ के रूप में काम करेगा. बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर भरे जाने वाले इन्यूमरेशन फॉर्म को इस प्रक्रिया की सबसे मजबूत कड़ी माना जा रहा है.

राजनीतिक दलों की भूमिका और पारदर्शिता

अभियान को सफल बनाने में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 74,320 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. ये एजेंट बीएलओ के साथ मिलकर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. जिससे धांधली की गुंजाइश कम हो जाएगी. आयोग का स्पष्ट संदेश है कि 5 अगस्त को जब मतदाता सूची का प्रारूप जारी होगा, तो उसमें केवल वही नाम शामिल होंगे जिनका सत्यापन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका होगा.

नए मतदाताओं का स्वागत

यह अभियान केवल सुधार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विस्तार पर भी केंद्रित है. जो युवा 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं या करने वाले हैं, उनका पंजीकरण भी इस अभियान के दौरान किया जाएगा. घर-घर पहुंचने का एक मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे.

शहरी बनाम ग्रामीण : मैपिंग में स्पष्ट अंतर

राज्य में अब तक 82.08 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच प्रदर्शन का अंतर चिंता का विषय है. रांची, हटिया और कांके जैसे शहरी विधानसभा क्षेत्रों में मैपिंग की रफ्तार धीमी रही है. जहां 45 प्रतिशत तक मतदाता अभी भी सत्यापन की प्रतीक्षा में हैं. इसके विपरीत, तमाड़, मांडर और सिल्ली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों ने 85 प्रतिशत से अधिक मैपिंग का आंकड़ा छूकर मिसाल पेश की है.

इन्यूमरेशन फॉर्म : सत्यापन का डिजिटल आधार

• पारदर्शिता पर जोर : इस बार की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है. BLO मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म की दो प्रतियां उपलब्ध कराएंगे. इसमें मतदाता का नाम, पता, ईपीआईसी नंबर, आयु, लिंग, पिता/पति का नाम और मोबाइल नंबर जैसी विस्तृत जानकारी दर्ज होगी.
• दोहरी रसीद प्रणाली : एक प्रति मतदाता को अपने पास रसीद के रूप में रखनी होगी, जबकि दूसरी प्रति हस्ताक्षर के बाद BLO को सौंपनी होगी.
• कानूनी जवाबदेही : यदि कोई मतदाता फॉर्म पर हस्ताक्षर किए बिना वापस करता है, तो उसे अमान्य माना जाएगा. इसके अलावा, गलत जानकारी या फर्जी घोषणा-पत्र जमा करने वालों के खिलाफ निर्वाचन आयोग कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार है.
• दस्तावेजों का नियम : आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं को किसी भी प्रकार के दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है. मूल दस्तावेज केवल सत्यापन के लिए बीएलओ को दिखाए जा सकते हैं, उन्हें अपने पास रखने की अनुमति नहीं है.

कब क्या होगा

• 30 जून से 29 जुलाई : BLO द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन, फॉर्म वितरण और संग्रह का कार्य.
• 5 अगस्त : मतदाता सूची के प्रारूप का आधिकारिक प्रकाशन.
• 5 अगस्त से 3 अक्टूबर : दावा और आपत्तियां दर्ज कराने का समय.
4 सितंबर : दावा और आपत्तियों का अंतिम निस्तारण.

अनमैप्ड मतदाताओं की चुनौती : जिलेवार स्थिति

• राज्य में कुल 47,42,505 मतदाता ऐसे हैं जो फिलहाल अनमैप्ड की श्रेणी में हैं.
• रांची जिला में सबसे अधिक 8.09 लाख अनमैप्ड मतदाता.
• धनबाद (5.27 लाख), पूर्वी सिंहभूम (5.21 लाख), बोकारो (3.74 लाख), गिरिडीह (2.80 लाख) और पलामू (2.35 लाख) जैसे बड़े जिलों में भी बड़ी संख्या में सत्यापन बाकी है.
• लोहरदगा में सबसे कम 25,446 मतदाता सत्यापन की प्रतीक्षा में हैं.

 

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