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झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री से लगायी न्याय की गुहार, दमनकारी नीतियों को वापस लेने की मांग, कैबिनेट संशोधन पर जताई आपत्ति

Ranchi: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग पर सचिवालय सेवा के अधिकारियों और...

Ranchi: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग पर सचिवालय सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण एवं दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है. अपनी मांग को लकेर सचिवालय संघ के कर्मी आज मुख्यमंत्री आवास पर हेमंत सोरेन से मिलने गए थे. लेकिन सीएम की व्यस्तता की वजह से उनकी मुलाकात नहीं हो पायी. अब वो कार्मिक विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो से मिलकर अपनी मांग को रखेंगे. संघ का कहना है कि विभाग के हालिया फैसलों से सचिवालय सेवा के पदाधिकारियों के प्रमोशन, पदस्थापन और करियर प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

संयुक्त सचिव और उप सचिव के नए पदों के सृजन की मांग

संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सचिवालय सेवा में संयुक्त सचिव के 24 और उप सचिव के 41 नए पदों के सृजन के प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी जाए. इसके साथ ही वर्षों से लंबित प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी कर योग्य अधिकारियों को उनके नियमित पदों पर पदस्थापित करने और रिक्त पदों को जल्द भरने की भी मांग की गई है.

APAR व्यवस्था पर उठाए सवाल

संघ ने पत्र में कहा है कि सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए पिछले एक वर्ष से वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (APAR) को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. इससे अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. संघ ने इस व्यवस्था की समीक्षा कर सभी अधिकारियों के लिए समान, पारदर्शी और न्यायसंगत मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की मांग की है.

कैबिनेट संशोधन पर जताई आपत्ति

संघ ने दो जुलाई 2026 को मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत संकल्प संख्या-3286 में किए गए संशोधनों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज करायी है. संघ का कहना है कि इन बदलावों से सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ असमानता होगी और उन्हें अन्य सेवाओं की तुलना में पदोन्नति के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ेगा. इससे सेवा के अधिकारियों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

एक सप्ताह में निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री से मांगों पर एक सप्ताह के भीतर ठोस और सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है. संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो सदस्यों की बैठक बुलाकर लोकतांत्रिक एवं वैधानिक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी. संघ का कहना है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित विभाग की होगी.

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