Ranchi : झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों वाहनों का गणित चर्चा का विषय बना हुआ है. जहां एक तरफ वित्त मंत्री की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ विभाग के एक नोटिस ने पूरे ताम-झाम को वापस करने पर मजबूर कर दिया. मामला वित्त मंत्री और पुलिस महानिदेशक के बीच के पत्राचार का है. वित्त मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 पुलिस जवानों की ‘कठिनाइयों’ को समझते हुए प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें आवागमन के लिए एक अतिरिक्त गाड़ी (कुल 4) चाहिए. उनका तर्क था कि 16 जवानों को 3 गाड़ियों में ठूंसना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि सुरक्षा के मानकों और मानवीय गरिमा के लिहाज से भी अनफिट है. मंत्री की चिंता थी कि आखिरकार सुरक्षाकर्मियों की भी अपनी मर्यादा होती है. वे कोई सामान तो हैं नहीं कि जहां जगह मिली, वहीं फिट कर दिए जाएं.
जब नोटिस ने मंत्री जी को किया शर्मसार
लेकिन, सरकारी फाइलों की गति और नौकरशाही की अपनी ठंडक के आगे मंत्री की गुहार ठंडी पड़ गई. कई हफ्तों तक डीजीपी DGP कार्यालय से कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद हद तो तब हो गई जब वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह ने 2022 के एक पुराने सर्कुलर का हवाला देते हुए मंत्री जी के ही आप्त सचिव को नोटिस थमा दिया कि एक वाहन तुरंत वापस कीजिए. इसके बाद मंत्री के लिए यह स्थिति सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि एम्बैरेसिंग (शर्मनाक) हो गई.

16 जवान और तीन वाहन वापस करने का फैसला
इसके बाद वित्त मंत्री ने तल्ख रुख अपनाते हुए कह दिया कि अगर आप एक गाड़ी भी नहीं दे सकते और उल्टे नोटिस थमा रहे हैं, तो मुझे ऐसी सुरक्षा ही नहीं चाहिए. उन्होंने 16 जवानों और तीनों गाड़ियों को ससम्मान पुलिस मुख्यालय को वापस करने का फैसला कर लिया. फिलहाल वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तो सुरक्षा वापस कर दी है, लेकिन झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था ने अपनी कार्यशैली पर खुद ही एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा लिया है.


