Ranchi: झारखंड में अब सरकारी कर्मिय़ों के लिए प्रमोशन का नया फॉर्मूला लागू होगा. पिछले कैबिनेट में लिए गए निर्णय के तहत इस नए फॉर्मूले को लागू कर दिया गया है. इसके तहत अब प्रोबेशन पीरियड और प्रमोशन के लिए जरूरी सेवा अवधि को अलग-अलग गिना जाएगा. इस बदलाव का सीधा असर यह होगा कि कर्मचारियों को पहले प्रमोशन के लिए अब दोगुनी मेहनत और अधिक समय तक इंतजार करना होगा.
क्या बदला है प्रमोशन का नियम
- अब तक की व्यवस्था में प्रोबेशन पीरियड और प्रमोशन के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि की गणना एक साथ हो जाती थी. सरल शब्दों में कहें तो, प्रोबेशन की अवधि के दौरान की गई सेवा को ही प्रमोशन की पात्रता में जोड़ लिया जाता था. लेकिन नए संकल्प के अनुसार, अब सरकार ने इन दोनों अवधियों को पूरी तरह से अलग कर दिया है.
- संशोधित नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी को पहले अपना अनिवार्य 2 साल का प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) पूरा करना होगा. इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही प्रमोशन के लिए तय सेवा अवधि की उलटी गिनती शुरू होगी. अब प्रोबेशन के 2 साल प्रमोशन वाली सेवा अवधि में अब नहीं जुड़ेंगे.कर्मचारी को पहले अपने 2 साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा करना होगा. यह अवधि खत्म होने के बाद, अगले 2 साल की सेवा और करनी होगी, तभी वह प्रमोशन का पात्र माना जाएगा. यानी अब कुल 4 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही उसे पहला प्रमोशन मिल पाएगा.
क्यों हुआ नियमों में यह बदलाव
राज्य सरकार का तर्क है कि पुरानी व्यवस्था के कारण विभिन्न विभागों और सेवाओं के बीच तालमेल में परेशानीआ रही थी. कई सेवाओं में प्रोबेशन और प्रमोशन की अवधि लगभग एक साथ पूरी हो रही थी, जिसे सरकार ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से गलत माना. सरकार का तर्क है कि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने और नियमों में एकरूपता लाने के लिए यह संशोधन किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन सेवाओं की अपनी अलग नियमावली है, वहां पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे. हालांकि, जिन विभागों में ऐसी कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, वहां अब वर्ष 2014 के संकल्प का यह नया स्वरूप ही लागू होगा. साथ ही, जिन ग्रेड पे के बीच प्रमोशन की अवधि स्पष्ट नहीं थी, वहां अब बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि को जोड़कर पात्रता का निर्धारण किया जाएगा.

सचिवालय सेवा संघ ने खोला मोर्चा
सरकार के इस फैसले के आते ही झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस संशोधन को तत्काल रद्द करने की मांग की है. सचिवालय सेवा संघ का स्पष्ट मानना है कि सरकार का यह कदम कर्मचारियों के साथ अन्याय है. संघ का तर्क है कि वर्ष 2014 में जो संकल्प (संख्या-3286) लाया गया था, उसका मूल उद्देश्य राज्य के सभी सेवा संवर्गों में पदोन्नति की अवधि में समानता लाना था. संघ का आरोप है कि 12 साल बाद किए गए इस बदलाव से न केवल वह समानता खत्म हो जाएगी, बल्कि विभागों के बीच गहरा भेदभाव भी पैदा होगा.
समानता के बजाय असमानता बढ़ा रहा नया नियम
सचिवालय सेवा संघ ने 12 साल पुरानी और सुचारू रूप से चल रही व्यवस्था को बदलने की मंशा पर सवाल उठाए हैं. संघ के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से सचिवालय सेवा के कर्मियों को बड़ा नुकसान होगा. एक ओर जहां अन्य सेवाओं में लेवल-7 से लेवल-8 में जाने के लिए मात्र 2 साल का समय लगेगा, वहीं इस नए नियम के तहत सचिवालय सेवा के अधिकारियों को उसी प्रमोशन के लिए 8 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
अब आगे क्या
फिलहाल, यह संशोधित संकल्प राज्य के कई विभागों में लागू हो चुका है, लेकिन सचिवालय सेवा संघ का विरोध इसे एक बड़े विवाद की ओर ले जा रहा है. सचिवालय कर्मियों की नाराजगी को देखते हुए अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं. क्या सरकार अपने इस फैसले पर अडिग रहेगी या फिर कर्मचारियों के दबाव में आकर इस पर कोई संशोधन करेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. फिलहाल, कर्मचारी संघ आर-पार के मूड में है और उन्होंने मांग की है कि किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले कर्मचारियों के हितों का ख्याल रखा जाए और पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाए ताकि प्रशासनिक सेवा में काम करने वाले सभी कर्मियों के साथ समान व्यवहार हो सके.


