Ranchi: राज्य के छात्र भले ही अपनी डिग्रियों, परीक्षाओं और भविष्य के मुद्दों को लेकर परेशान हों, लेकिन राजनीतिक दलों की चिंता का स्तर कुछ अलग ही है. नेताओं के लिए छात्रों का मुद्दा अब एक अदद ऐसा फ्लैशपॉइंट बन गया है, जिसके कंधे पर बंदूक रखकर सियासी रोटियां सेंक रहे हैं. कल तक जिस राजनीतिक संघर्ष की परिभाषा लाठी-डंडों, रैलियों और भाषणों से तय होती थी, आज उसका आधुनिक संस्करण लांच हो चुका है. अब झारखंड की राजनीति में छात्रों के आंदोलन का मतलब है पत्थरबाजी, टमाटर, अंडे और पानी की बोतलों का बहुआयामी प्रदर्शन.
प्रेस कॉन्फ्रेंस, आग उगलो प्रतियोगिता का नया दौर
सड़क पर धक्का-मुक्की और एक-दूसरे की तरफ फेंकी गई खाली बोतलों के बाद, असली जंग स्टूडियोनुमा कमरों में शुरू होती है. राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली अब कुछ ऐसी हो चली है. जोरदार प्रदर्शन करो. कैमरों के सामने आकर एक-दूसरे के खिलाफ शब्दों के गोले दागते हुए आग उगलो और अंत में, इस पूरी प्रक्रिया को अपनी महान उपलब्धि मानकर जश्न मनाओ. राजनीतिक दलों का हाल यह हो गया है कि बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस किए काम नहीं होता.
व्हाट्सएप की दुनिया, प्रेस विज्ञप्ति का अंतहीन सैलाब
आज के इस दौर में व्हाट्सएप ग्रुप किसी युद्ध के मैदान से कम नहीं हैं. पत्रकारों के स्मार्टफोन अब राजनीतिक दलों के प्रेस रिलीज बम से लगातार धमाके झेल रहे हैं. प्रवक्ताओं की इस रेस का आलम यह है कि जैसे ही कांग्रेस के व्हाट्सएप ग्रुप पर एक लंबी-चौड़ी प्रेस विज्ञप्ति की घंटी बजती है, ठीक उसी माइक्रो-सेकंड के भीतर बीजेपी के दफ्तर से भी पलटवार वाला प्रेस रिलीज हाजिर हो जाता है. ऐसा लगता है मानो दोनों दलों के प्रवक्ताओं ने उंगलियों की टाइपिंग स्पीड बढ़ाने के लिए विशेष ओलंपिक ट्रेनिंग ले रखी हो. प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की यह बाढ़ इतनी भयानक है कि कई पत्रकारों के फोन की स्टोरेज क्षमता अब जवाब देने लगी है.
ट्विटर (X) वार: शब्दों के तीर और इमोजी की तलवारें
मैदान और व्हाट्सएप के बाद, वर्चुअल दुनिया का सबसे बड़ा दंगल ट्विटर (X) पर सजता है. यहां विचारधारा की लड़ाई से ज्यादा इस बात की होड़ लगी रहती है कि किस नेता का ट्वीट ज्यादा कैची है और किस पर ज्यादा री-ट्वीट आए. एक दल के नेताजी ने कोई तंज कसा नहीं कि दूसरे दल के सोशल मीडिया सेल के जांबाज सिपाही तुरंत मीम और पुराने वीडियो के साथ हाजिर हो जाते हैं. यहां तीखे बयानों की जगह अब चुटीले कैप्शन, तंज भरे हैशटैग और तीखे कटाक्षों का इस्तेमाल किया जाता है. जनता बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझती रहे, लेकिन हमारे माननीय ट्विटर के एल्गोरिदम में ट्रेंड करने के लिए अपनी ऊर्जा झोंक रहे हैं.
