Ranchi : केंद्र सरकार के दो विभागों के बीच का विरोधाभास अब देश के करोड़ों नागरिकों के लिए भ्रम का बड़ा कारण बन गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा सरकार ने नीतियों की धज्जियां उड़ा दी हैं. झामुमो ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि जब एक तरफ सरकार का विदेश मंत्रालय कहता है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं बल्कि सिर्फ एक ‘ट्रैवल डॉक्युमेंट’ है, तो दूसरी तरफ एसआइआर की प्रक्रिया में नागरिकता सिद्ध करने के लिए क्रम संख्या 1 पर पासपोर्ट को ही क्यों स्वीकार किया जा रहा है. आखिर एक ही सरकार के दो अलग-अलग मानदंड क्यों हैं.
एक देश, दो नियम : आखिर सच क्या है
झामुमो ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. पार्टी का कहना है कि देश के करोड़ों नागरिकों को इस विरोधाभास के कारण अंधकार में रखा जा रहा है. अगर विदेश मंत्रालय का यह आधिकारिक रुख सही है कि पासपोर्ट से नागरिकता साबित नहीं होती है, तो फिर चुनाव आयोग और एसआइआर की प्रक्रिया के तहत इसे सबसे पहला और प्रामाणिक दस्तावेज मानकर किस आधार पर स्वीकार किया जा रहा है? और अगर एसआइआर की प्रक्रिया सही है, तो विदेश मंत्रालय का बयान देश को गुमराह करने वाला है. नागरिकों को भ्रम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और एकरूप नियम चाहिए.

लाइन में खड़ा करना और देश बेचना ही भाजपा का काम
भाजपा की राजनीतिक शैली और नीतियों पर सीधा प्रहार करते हुए झामुमो ने अपने पोस्ट में बेहद आक्रामक रुख अपनाया है. पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का मुख्य काम सिर्फ कुछ चुनिंदा एजेंडों तक सीमित रह गया है. हर दूसरे साल किसी न किसी बहाने देशवासियों को लंबी लाइनों में खड़ा कर देना. हमेशा पड़ोसी देश पाकिस्तान से तुलना करते रहना और अमेरिका के सामने नतमस्तक रहना. चीन को अपनी जमीन लूटने की छूट देना और देश के संसाधनों को ‘दो सेठों’ के हाथों बेच देना.
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