हजारीबाग में खतियानी परिवार की हुंकार: केंद्र की गलत नीतियों से कोलकाता व्यापारिक बाजार की उपेक्षा, रेलवे स्टेशन से सीधी ट्रेन चलाने की उठी मांग

Hazaribagh : हजारीबाग जिला मुख्यालय के पुराना धरना स्थल के नजदीक शनिवार को खतियानी परिवार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक...

Hazaribagh : हजारीबाग जिला मुख्यालय के पुराना धरना स्थल के नजदीक शनिवार को खतियानी परिवार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक का आयोजन किया गया. अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में हजारीबाग के स्थानीय विकास, रेल कनेक्टिविटी की खामियों और घरेलू महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद की गई. बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए संगठन के महासचिव मोहम्मद हकीम ने कहा कि हजारीबाग में रेलवे स्टेशन तो बन गया और रेलगाड़ियों का आना-जाना भी शुरू हो गया, लेकिन आज भी हजारीबाग की आम जनता और यहां के व्यावसायिक वर्ग को इसका भरपूर और वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है. केंद्र की लचर नीतियों के कारण आज भी जिला वासियों को बुनियादी परिवहन सुविधाओं के लिए निजी बसों के भरोसे रहना पड़ रहा है.

कोलकाता जाने के लिए केवल बसों का सहारा, रांची-पटना ट्रेन का भाड़ा आम जनता की पहुंच से बाहर

महासचिव मोहम्मद हकीम ने हजारीबाग के व्यापारिक ताने-बाने पर बात करते हुए कहा कि हजारीबाग के लोगों और व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा, सुलभ और निकटतम व्यावसायिक बाजार कोलकाता है. विडंबना यह है कि हजारीबाग से कोलकाता आने-जाने के लिए रेलवे के पास कोई सीधी सुविधा नहीं है, जिसके कारण हर रात लगभग दर्जनों निजी बसें हजारीबाग से कोलकाता के लिए खुलती हैं और लोग मजबूरन महंगा सफर तय करते हैं। केंद्र सरकार ने इस रूट पर जो एकमात्र गाड़ी दी है, वह रांची से पटना चलती है, लेकिन उसका भाड़ा इतना अत्यधिक है कि आम जनता उससे कतरा रही है और यही वजह है कि पटना के लिए भी लोग बसों से सफर करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार हजारीबाग से सीधे कोलकाता के लिए एक अच्छी एक्सप्रेस ट्रेन चलाती, तो यहां के छोटे-बड़े व्यापारियों को एक सुलभ बाजार मिल जाता, लेकिन रेल मंत्रालय की अनदेखी के कारण कोलकाता बाजार पूरी तरह उपेक्षित हो गया है. खतियानी परिवार ने रेल मंत्रालय से पुरजोर आग्रह किया है कि हजारीबाग रेलवे स्टेशन से कोलकाता तक के लिए अविलंब सीधी ट्रेन सेवा बहाल की जाए.

महंगे गैस सिलेंडर से गृहणियां परेशान, गैस के स्थान पर कोयला डिपो के निर्माण से मिलेगा रोजगार

बैठक में देश के भीतर डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों पर भी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की गई. वक्ताओं ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मुख्य जिम्मेवारी केंद्र सरकार की है, लेकिन वह इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है. आज रसोई गैस की बेलगाम कीमतों के कारण हमारे देश और विशेषकर हजारीबाग की गृहणियों का बजट पूरी तरह प्रभावित और ध्वस्त हो चुका है. हजारीबाग इस संकट से अछूता नहीं है. उन्होंने कहा कि हजारीबाग जिला कोयले के भरपूर भंडार पर बसा है, लेकिन यहां के स्थानीय कोल डिपो बंद हो जाने के कारण आम लोग गैस की कीमतों की बराबरी नहीं कर पा रहे हैं. इसके पूर्व भी खतियानी परिवार ने बंद पड़े कोयला डिपो को चालू करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की थी. अगर प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय सांसद और विधायक इस पर त्वरित ध्यान दें, तो हजारीबाग की जनता को इस बहुत बड़ी समस्या से मुक्ति मिल जाएगी. गैस के विकल्प के रूप में कोयला डिपो का निर्माण होने से न केवल लोगों को सस्ता ईंधन मिलेगा, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय युवाओं को बड़ा रोजगार भी नसीब होगा.

बैठक में खतियानी परिवार के इन प्रमुख सदस्यों ने दर्ज कराई अपनी उपस्थिति

पुराना धरना स्थल के पास आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और जनहित की इस लड़ाई को सड़क तक ले जाने का संकल्प लिया गया. इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित सदस्य गणों में मदेश विश्वकर्मा, छवी यादव, मोहम्मद असलम, अलीजान मियाँ, मोहम्मद आशिक, हन्जला हाशमी, अशरफ अली, वोधी साँव, तनवीर अहमद, विजय मिश्रा, राम चन्द्र राम, मोहम्मद नईम, मेघन मेहता, वालेशवर कुमार दास और शोएब अन्सारी सहित भारी संख्या में अन्य स्थानीय गणमान्य लोग और खतियानी परिवार के कार्यकर्ता उपस्थित थे. बैठक के अंत में खतियानी परिवार के महासचिव मोहम्मद हकीम ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो संगठन आगे की उग्र रणनीति तय करने को बाध्य होगा.

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