नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखा पत्र, कहा- ‘108 एम्बुलेंस सेवा में हो रही करोड़ों की धांधली, महीनों से खड़े हैं खटारा वाहन’

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर सवाल खड़े किए हैं. इसको लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य...

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Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर सवाल खड़े किए हैं. इसको लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है, पत्र में कहा है कि एक तरफ जहां कागजों पर एम्बुलेंस दौड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर सरकारी खजाने की खुली लूट मची हुई है. राज्य भर में संचालित कुल एम्बुलेंस वाहनों में से लगभग 80 वाहन विभिन्न जिलों में पिछले कई महीनों से पूरी तरह खराब पड़े हैं. इसके बावजूद, विभाग की कथित मिलीभगत से संचालक एजेंसी सम्मान फाउंडेशन को प्रति वाहन 93,000 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है.

करोड़ों की चपत, कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआई बकाया

पत्र में कहा है कि महीनों से खड़े 80 खराब वाहनों का कुल मिलाकर 618 महीना बनता है, जिसके एवज में विभाग द्वारा एजेंसी को 5 करोड़ 74 लाख 74 हजार रुपये का अवैध भुगतान किया जा चुका है. सम्मान फाउंडेशन के संचालक इरफान आलम पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने लगभग 2200 कार्यरत चालकों, टेक्नीशियनों और कॉल सेंटर स्टाफ का फरवरी 2025 से अक्टूबर 2025 (9 महीने) तक का लगभग 7 करोड़ 12 लाख रुपये का पीएफ और ईएसआई अंशदान जमा नहीं किया है. कर्मचारियों को फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक का वेतन नहीं मिला है. बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद भुगतान न होने से हजारों कर्मियों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

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बाबूलाल मरांडी का पत्र, पीडीएफ के लिए यहां क्लिक करें

Leader of the Opposition Babulal wrote to the Additional Chief Secretary of the Health Department, stating, “There is a multi-crore rupee scam in the ‘108’ ambulance service; dilapidated vehicles have been lying idle for months.”

जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से मांग की है कि इस पूरे वित्तीय घोटाले और कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. साथ ही, एजेंसी को किए गए अतिरिक्त भुगतान की राशि को वापस लेते हुए सम्मान फाउंडेशन को तुरंत ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डाला) किया जाए. इसके अलावा, इस लूटतंत्र में शामिल दोषी विभागीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में सरकारी धन और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके.

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