लोहरदगा में ‘हर घर जल’ का दावा फेल? कागजों में सफलता, गांवों में पानी के लिए जंग

Lohardaga: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था. वर्ष...

Lohardaga: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत 2024 तक “हर घर जल” का लक्ष्य तय किया गया था. लोहरदगा में भी प्रशासन लगातार प्रगति के दावे करता रहा, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है. कई गांवों में पाइपलाइन बिछी, नल लगे, लेकिन नियमित जलापूर्ति अब भी सपना बनी हुई है.

जानकारी के अनुसार लोहरदगा जिले में कुल 92,807 घर हैं. 15 अगस्त 2019 तक केवल 10,141 घरों तक नल से पानी पहुंचता था. योजना लागू होने के बाद वर्तमान में 72,348 घरों तक पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, जो कुल घरों का लगभग 77.96 प्रतिशत है. हालांकि ग्रामीण इलाकों की वास्तविक स्थिति इन आंकड़ों से मेल नहीं खाती.

कहीं मोटर खराब, कहीं पाइपलाइन बेकार 

कई गांवों में योजना अधूरी पड़ी है. कहीं मोटर खराब है, कहीं सोलर प्लेट बेकार पड़ी है, तो कहीं पाइपलाइन में पानी ही नहीं पहुंच रहा. इसके कारण ग्रामीण आज भी हैंडपंप, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं.

नवाटोली गांव बना बड़ा उदाहरण

नवाटोली गांव में लगभग 250 परिवार रहते हैं. यहां जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाई गई और घर-घर नल लगाए गए. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब पानी की समस्या खत्म होगी, लेकिन सिर्फ एक सप्ताह तक पानी मिलने के बाद पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई.

महिलाओं की बढ़ी परेशानी

अब गांव की महिलाएं सुबह से ही पानी जुटाने में लग जाती हैं. कोई कुएं से पानी भर रहा है तो कोई दूर लगे हैंडपंप तक जा रहा है. गर्मी बढ़ने के साथ यह संकट और गहरा हो रहा है.

बिजली संकट भी बड़ी वजह

ग्रामीणों का कहना है कि जहां मोटर आधारित जलापूर्ति व्यवस्था है, वहां बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण पानी नहीं मिल पा रहा. कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ.

जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल

राधा तिर्की ने कहा कि कई गांवों में योजना सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है. लोगों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा. उन्होंने खराब मोटर, सोलर प्लेट और पाइपलाइन की जल्द मरम्मत की मांग की है.

ग्रामीणों की मांग 

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजना अच्छी है, लेकिन रखरखाव और निगरानी की कमी से लोग परेशान हैं. उन्होंने जिला प्रशासन से गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने और बंद योजनाओं को जल्द चालू कराने की मांग की है.

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