Koderma: जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत मसमोहना-महेशपुर मार्ग पर स्थित धुमाडीह-रायडीह के बीच बहने वाली केशो नदी में पत्थर खदान की मिट्टी भरकर नदी को पाटने का मामला सामने आया है. इस कारण नदी का स्वरूप लगातार सिकुड़ता जा रहा है और उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.
250 फीट से सिमट रही नदी
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कभी 250 फीट चौड़ी बहने वाली केशो नदी में अवैध रूप से खदान माफियाओं द्वारा मिट्टी डाली जा रही है. पुरनाडीह पंचायत के रायडीह निवासी चंद्रदेव दास ने बताया कि माफियाओं की मनमानी के कारण नदी अब 250 फीट से घटकर मात्र 150-200 फीट की चौड़ाई में सिमटकर रह गई है. नदी के किनारे मिट्टी का अवैध डंपिंग किया जा रहा है.

खेती की जमीन पर मंडरा रहा खतरा
श्री दास ने कहा कि उनकी जमीन नदी के ठीक बगल में है. उन्हें डर है कि मानसून में अत्यधिक बारिश होने पर नदी में भरी गई मिट्टी बहकर उनकी खेती योग्य जमीन में चली जाएगी. इससे उनकी फसल के साथ-साथ जमीन भी बर्बाद हो जाएगी.
कार्रवाई की उठी मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण खदान माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. नदी पाटने से जल निकासी भी प्रभावित होगी और बाढ़ की स्थिति बन सकती है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और नदी से अवैध रूप से भरी गई मिट्टी को हटाकर नदी के मूल स्वरूप को बहाल किया जाए.


