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राम मंदिर दान घोटाला: कांग्रेस ने पूछा- ‘जब PM की देखरेख में बना ट्रस्ट, तो चुप क्यों हैं प्रधानमंत्री, भगवान राम किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं’

Ranchi: अयोध्या राम मंदिर के दान और खर्चों में हुई कथित हेराफेरी को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ...

Ram Temple donation scam: Congress asks, "When the trust was formed under the PM's supervision, why is the PM silent? Lord Ram is not the property of any political party."

Ranchi: अयोध्या राम मंदिर के दान और खर्चों में हुई कथित हेराफेरी को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मानिक राव ठाकरे ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा. कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र हैं. ठाकरे ने आरोप लगाया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरों के बावजूद सरकार इस महाघोटाले पर जवाबदेही तय करने से भाग रही है और डबल इंजन की सरकार बड़े गुनहगारों को बचाने में जुटी है.

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चंपत राय के इस्तीफे पर सवाल

कांग्रेस नेता मानिक राव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सीधे सवाल दागे. उन्होंने पूछा कि जिस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ था, आज उसमें हुई धांधली की जिम्मेदारी कौन लेगा. अगर ट्रस्ट में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी, तो इसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफा क्यों देना पड़ा? चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार होना ही इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह महज कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित घोटाला है. कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को हटाए जाने पर सरकार भ्रम क्यों फैला रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को नया महासचिव बनाकर मामले पर लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है.

SIT रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

कांग्रेस नेता मानिक राव ठाकरे ने SIT रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बावजूद नोट गिनने वाले कर्मचारी खुली नकदी और नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर ले जा रहे थे. ऐसी 70 घटनाएं कैमरे में कैद हुईं. इतनी बड़ी सुरक्षा चूक के बाद भी एसआईटी ने केवल 8 छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर की सिफारिश की है, जिससे साफ है कि रसूखदारों को बचाया जा रहा है.

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उत्सवों के नाम पर करोड़ों की फूंक

22 जनवरी 2024 को प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में 8,000 मेहमानों के सत्कार और कार्यक्रम पर करीब 113 करोड़ खर्च किए गए. 25 नवंबर 2025 को ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग 10.12 करोड़ उड़ाए गए. इसके अलावा फर्जी रसीदों और नकद चढ़ावे की हेराफेरी ने देश के भक्तों को आहत किया है. उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर में भी ऐसे ही हालिया दान मामले ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

कांग्रेस की 4 बड़ी मांगें

• सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच: सरकार अगर पाक-साफ है, तो सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में स्वतंत्र न्यायिक जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कराने से क्यों डर रही है?
• नेताओं की गिरफ्तारी: पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और घोटाले में शामिल अन्य रसूखदार लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए.
• ट्रस्ट हो भंग: वर्तमान विवादित ट्रस्ट को तुरंत भंग कर देश के प्रतिष्ठित धर्माचार्यों, विद्वानों और विशेषज्ञों को शामिल कर एक नया पारदर्शी ट्रस्ट बनाया जाए.
• फॉरेंसिक ऑडिट सार्वजनिक हो: मंदिर को मिले कुल चंदे, चढ़ावे, जमीन की खरीद-बिक्री और आयोजनों के खर्चों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराकर रिपोर्ट देश के सामने रखी जाए.

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