NewsWave Opinion: मातृ दिवस यानी मां का दिन. “मां” सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरी दुनिया है. यह कहना गलत नहीं होगा कि एक मां ही हर बच्चे की पहली शिक्षिका, मार्गदर्शक और सबसे अच्छी मित्र होती है. एक मां ही होती है जो अपने छोटे से बच्चे का हाथ पकड़कर उसे चलना सिखाती है. वह हमें बोलना, लिखना और जीवन जीना सिखाती है.
मां बिना बोले भी समझ जाती है
एक मां ही होती है जो अपने छोटे से बच्चे की तोतली बोली को भी समझ लेती है. यहां तक कि जब बच्चा बोलना भी नहीं जानता, तब भी मां समझ जाती है कि उसके बच्चे को क्या चाहिए. बच्चे के रोने मात्र से मां को पता चल जाता है कि बच्चा क्यों रो रहा है और उसे किस चीज की जरूरत है. इसलिए कहा जाता है कि मां भगवान का रूप होती है.

बच्चे के साथ जुड़ी होती है मां की दुनिया
जब बच्चा छोटा होता है, तो उसकी नींद के साथ मां की नींद भी जुड़ी होती है. बच्चा जागता है तो मां जागती है और बच्चा सोता है तो मां भी आराम करती है. मां ममता, प्रेम और देखभाल की सबसे बड़ी प्रतीक होती है.
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मां बच्चे के मन को पढ़ लेती है
एक मां ही होती है जो अपने बच्चे के चेहरे को देखकर समझ जाती है कि उसका बच्चा खुश है या दुखी. उसके मन में क्या चल रहा है, यह भी मां आसानी से महसूस कर लेती है. बच्चा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, मां के लिए वह हमेशा छोटा बच्चा ही रहता है. मां हर उम्र में अपने बच्चे की चिंता करती है.
हर सफलता के पीछे मां का संघर्ष
एक बच्चे की सफलता के पीछे मां का बहुत बड़ा योगदान होता है. जिस दिन बच्चा जन्म लेता है, उसी दिन से मां की जिम्मेदारियां शुरू हो जाती हैं. चलना, खाना, बोलना और लिखना सिखाने से लेकर जीवन के हर मोड़ पर मां अपने बच्चे के साथ खड़ी रहती है.
मां बिना किसी स्वार्थ के जीती है
इस धरती पर मां ही एक ऐसी इंसान है जो अपना पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए समर्पित कर देती है और बदले में कभी कुछ नहीं मांगती. मां के लिए उसके बच्चे की खुशी और चेहरे की मुस्कान ही सबसे बड़ी दौलत होती है. बच्चे की छोटी-सी खुशी भी मां को सुकून देती है.
मां हमेशा सुरक्षा कवच बनकर खड़ी रहती है
मां खुद कितना भी दर्द क्यों न सह ले, कितनी भी आलोचनाएं क्यों न झेल ले, लेकिन वह हमेशा अपने बच्चे के साथ खड़ी रहती है. वह हर मुश्किल परिस्थिति में अपने बच्चे का मनोबल बढ़ाती है और उसे पूरा समर्थन देती है. मां अपने बच्चे के लिए हमेशा एक सुरक्षा कवच की तरह होती है.
मां है तो दुनिया है
इसलिए आज हम सभी को दुनिया की हर मां को सम्मान और धन्यवाद देना चाहिए. हम आज जो कुछ भी हैं, वह मां के अनगिनत बलिदानों, उनके प्यार, समर्थन और मार्गदर्शन की वजह से ही हैं. यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि मां के प्यार और देखभाल की तुलना इस दुनिया की किसी भी चीज से नहीं की जा सकती. मां है तो पूरी दुनिया है, मां नहीं तो कुछ भी नहीं.
अभिनव मिश्रा, अधिवक्ता
झारखंड उच्च न्यायालय
