कागजों में गुलजार, हकीकत में वीरान! विष्णुगढ़ इंटर महाविद्यालय में शिक्षा नहीं, अनुदान बचाने की जंग?

Hazaribagh : जिस जगह से भविष्य संवरना चाहिए, वहां अगर सिर्फ रजिस्टर सजाए जा रहे हों, तो यह केवल एक संस्थान की...

Hazaribagh : जिस जगह से भविष्य संवरना चाहिए, वहां अगर सिर्फ रजिस्टर सजाए जा रहे हों, तो यह केवल एक संस्थान की नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी, विष्णुगढ़ इंटर महाविद्यालय इन दिनों ऐसे ही गंभीर सवालों के केंद्र में है, जहां पढ़ाई से ज्यादा चर्चा फर्जी उपस्थिति और सरकारी अनुदान के कथित खेल की हो रही है, आरोप है कि महाविद्यालय में क्लासरूम अक्सर खाली रहते हैं, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर छात्रों की मौजूदगी से भरे रहते हैं, यानी कागजों में शिक्षा पूरी रफ्तार से दौड़ रही है, जबकि हकीकत में छात्रों को नियमित पढ़ाई तक नसीब नहीं हो रही, स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां वर्षों से ऐसी व्यवस्था चल रही है, जहां छात्रों को सिर्फ नामांकन लेने और परीक्षा देने तक सीमित कर दिया गया है.

उपस्थिति इतनी बेहतर कैसे

सूत्रों की मानें तो सरकारी अनुदान पाने के लिए न्यूनतम उपस्थिति और बेहतर परीक्षा परिणाम जरूरी होते हैं, ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि इन्हीं मानकों को पूरा दिखाने के लिए हाजिरी के आंकड़ों का खेल खेला जा रहा है, सवाल यह है कि जब नियमित कक्षाएं ही नहीं चलतीं, तो आखिर उपस्थिति इतनी बेहतर कैसे हो जाती है? सबसे दुखद पहलू यह है कि इस पूरे सिस्टम का सबसे बड़ा नुकसान गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है, जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के सपने के साथ कॉलेज भेजा, उन्हें बदले में शिक्षा नहीं, सिर्फ औपचारिकताएं मिल रही हैं, कई छात्रों के लिए कॉलेज अब पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सिर्फ परीक्षा फॉर्म और एडमिट कार्ड लेने की जगह बनकर रह गया है.

ब्लैक बोर्ड से ज्यादा मजबूत हाजिरी रजिस्टर

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि जब किसी शिक्षण संस्थान में ब्लैकबोर्ड से ज्यादा मजबूत हाजिरी रजिस्टर हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि शिक्षा अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है, यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है.

क्यों मौन है जिम्मेवार

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिक्षा विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर मौन क्यों हैं? क्या उन्हें इन हालात की जानकारी नहीं, या फिर सबकुछ जानकर भी आंखें मूंद ली गई हैं? यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षा के मंदिर धीरे-धीरे केवल अनुदान केंद्र बनकर रह जाएंगे.

सिस्टम कठघरे में

विष्णुगढ़ इंटर महाविद्यालय से उठ रहे ये सवाल अब पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, क्योंकि जब शिक्षा कागजों तक सीमित हो जाए, तो सबसे बड़ा नुकसान समाज और आने वाली पीढ़ियों का होता है.

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