Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित परिवहन विभाग के MOU कार्यक्रम के दौरान कहा कि लंबे समय से चली आ रही कार्ययोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. टाटा मोटर्स और परिवहन विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस साझेदारी के तहत टाटा मोटर्स के सहयोग से राज्य के नौजवानों को बेहतर ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी. यह संस्थान वाहन चलाने के क्षेत्र में एक मानक और अनुशंसा केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी और चालकों को गाड़ियों की नई तकनीक सहित तमाम जरूरी जानकारियां मिल सकेंगी.
राज्य बनने से पहले बन जाना चाहिए था ट्रेनिंग सेंटर
सीएम ने कहा कि यह संस्थान राज्य बनने से पहले ही बन जाना चाहिए था. उन्होंने खुलासा किया कि इस ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना के लिए वे खुद पिछले 6 से 8 वर्षों से प्रयासरत थे. पंजाब में टाटा मोटर्स द्वारा पहले से ही ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा है. झारखंड जैसे खनन बहुल राज्य में, जहां बड़े पैमाने पर खनन उद्योग संचालित होते हैं और भारी वाहन चलते हैं, और ट्रकों का सबसे ज्यादा मैन्यूफैक्चरिंग हब भी यहीं है. वहां इस तरह के ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का न होना वाकई चिंता का विषय था. आज सामूहिक प्रयासों से यह सेंटर मूल रूप ले रहा है.
ड्राइविंग लाइसेंस वितरण और सरलीकरण पर विशेष निर्देश
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि एमओयू से पहले ही लगभग 10 हजार से अधिक लर्निंग और ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत किए गए हैं. उन्होंने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि लाइसेंस के जितने भी आवेदन लंबित हैं, उन्हें इस समझौते से पहले हर हाल में निष्पादित किया जाए. लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलताओं पर कटाक्ष करते हुए सीएम ने कहा कि लाइसेंस के लिए अभ्यर्थी कितनी जद्दोजहद करते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है. प्रक्रिया जितनी सरल हो, उतना ही बेहतर है. उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब लाइसेंस का आवेदन देने के बाद लोग यह भूल जाते थे कि उन्हें इतनी आसानी से लाइसेंस मिलेगा भी या नहीं. ऊपर से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की अलग परेशानी होती थी. वर्तमान जरूरतों पर बात करते हुए सीएम ने कहा कि आज मुख्य रूप से दो तरह के लाइसेंस की आवश्यकता होती है.एक लाइट व्हीकल्स (हल्के वाहन) के लिए और दूसरा हेवी व्हीकल्स (भारी वाहन) के लिए. हल्के वाहनों के लिए लोग किसी तरह जुगाड़ लगा लेते हैं, लेकिन बड़े वाहनों के लिए प्राइवेट संचालकों के भरोसे रहना पड़ता है.
प्राइवेट संचालकों पर निर्भरता और खनन क्षेत्र की जरूरतें
परिवहन विभाग को कड़े निर्देश देते हुए सीएम ने कहा कि भारी वाहनों के लाइसेंस निर्गत करने के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए, प्राइवेट संस्थान मुफ्त में लाइसेंस बनाकर नहीं देते हैं, वहां कुछ न कुछ चढ़ावा’ चढ़ाना ही पड़ता है. इतनी आसानी से लाइसेंस मिलने की उम्मीद प्राइवेट सेक्टर से नहीं की जा सकती. झारखंड में जिस तरह से खनन उद्योग, छोटे-बड़े कारखाने और विभिन्न ट्रांसपोर्ट सिस्टम चल रहे हैं, वहां बड़ी गाड़ियों का व्यापक उपयोग होता है. राज्य में लाखों की संख्या में बड़े वाहनों का परिचालन होता है, जिन्हें चलाने के लिए मान्यता प्राप्त और वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है. यह दस्तावेज केवल वाहन चलाने की अनुमति नहीं देता, बल्कि पहचान पत्र के रूप में भी कार्य करता है। वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और आधार जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो इसकी महत्ता को और बढ़ा देते हैं.
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तकनीक और सड़क सुरक्षा में सुधार की सख्त जरूरत
स्वीडन की मशहूर कंपनी ‘वोल्वो’ के विजिट का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उन्होंने वोल्वो का ट्रेनिंग सेंटर देखा है और सड़क सुरक्षा के मामले में हम उनसे सैकड़ों मील पीछे” हैं. वहां गाड़ियां सेंसर-बेस्ड होती हैं; यदि सड़क पर कोई जानवर भी गुजर रहा हो, तो गाड़ी के अंदर अलार्म बज जाता है. पर यहां तो हाथी गुजर जाए तो गाड़ी नहीं रुकती है. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन आधुनिक तकनीकों को जानना और समझना बेहद जरूरी है. आज राज्य में जितनी शानदार और तेज सड़कें बन रही हैं, उतनी ही रफ्तार से लोगों की जानें भी जा रही हैं. राज्य में छोटी-बड़ी गाड़ियां चलाने वालों को बेहतर ड्राइविंग सॉल्यूशन इस नए सेंटर के माध्यम से मुहैया कराया जाएगा. यहां स्थापित की जा रही ट्रेनिंग मशीनें एक बहुत अच्छी पहल हैं, लेकिन इसकी गति धीमी नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है.
विभाग की बड़ी जिम्मेदारी
सीएम ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा कि उनके पास अक्सर ऐसी शिकायतें पहुंचती हैं कि जाति, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ-साथ ड्राइविंग लाइसेंस समय पर नहीं बन पा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने माना कि अब स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और काम आगे बढ़ा है. परिवहन विभाग की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट देखने में भले ही एक छोटा विभाग लगता है, लेकिन इसके कार्य का दायरा और जिम्मेदारी बहुत बड़ी है. टाटा मोटर्स के साथ हुए इस नए करार से राज्य के युवाओं को पेशेवर और सुरक्षित ड्राइविंग का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे झारखंड में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और कुशल ड्राइवरों की फौज तैयार करने में बड़ी मदद मिलेगी.
