Bermo:डीवीसी में बड़े पैमाने पर वित्तीय कुप्रबंधन,नियमों के उल्लंघन और नियुक्तियों में कथित तौर पर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. डीवीसी के पूर्व मुख्य अभियंता अशोक कुमार जैन द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों के बाद, राज्यसभा सांसद और ऊर्जा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य दीपक प्रकाश ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह मामला एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की संस्थागत ईमानदारी, पारदर्शिता और व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है. इस पूरे विवाद की शुरुआत डीवीसी के पूर्व मुख्य अभियंता अशोक कुमार जैन द्वारा गत 19 मई को राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश को भेजे गए एक विस्तृत शिकायतीपत्र से हुई है. अपने पत्र में पूर्व मुख्य अभियंता ने डीवीसी के चेयरमैन एस सुरेश कुमार और पूर्व सदस्य (वित्त) अरूप सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कई गंभीर घोटालों और प्रशासनिक अनियमितताओं का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया था. जैन ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण डीवीसी की वित्तीय स्थिति बेहद खराब हो गई है.
वित्तीय कुप्रबंधन ऑर नकदी संकट
शिकायत पत्र में सबसे गंभीर आरोप वित्तीय कुप्रबंधन और नकदी संकट को लेकर लगाया गया है. बताया गया है कि अप्रैल 2026 में डीवीसी के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं थे. इस संकट से निपटने के लिए प्रबंधन ने नियमों के विरुद्ध जाकर पेंशन फंड ट्रस्ट से पैसे निकालने का मन बना लिया था, जिससे बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो सकता था. हालांकि, बाद में आनन-फानन में बैंकों से अल्पकालिक ऋण (शॉर्ट टर्म लोन) लेकर इस दायित्व को पूरा किया गया. इस नकदी संकट की मुख्य वजह डीवीसी में एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) के लिए ‘सैप’ सॉफ्टवेयर के अधूरे कार्यान्वयन को माना गया है. वाणिज्यिक इंजीनियरिंग विभाग उपभोक्ताओं को बिल भेजने में पूरी तरह विफल रहा, जिससे पिछले एक साल से डीवीसी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस कार्य की जिम्मेदारी ‘डेलॉयट’ (Deloitte) कंपनी को सौंपी गई थी, जिसने तय समय सीमा में काम पूरा नहीं किया.
नौकरी दिलवाने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप है कि पूर्व सदस्य (वित्त) ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने बेटे को डेलॉयट में 60 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर नौकरी दिलवाई, जिसकी गहन जांच होनी चाहिए. इसके अलावा, डीवीसी प्रबंधन पर डीवीसी अधिनियम 1948 का उल्लंघन करते हुए और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) की अनिवार्य मंजूरी के बिना वार्षिक प्रोत्साहन (एनुअल इंसेंटिव) के रूप में 300 करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित खर्च करने का आरोप है. इतना ही नहीं, बिना लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) जमा किए 1207 ऐसे पेंशनभोगियों को भुगतान किया गया जो अस्तित्व में ही नहीं थे.
नियमों की अनदेखी का आरोप
जांच के बाद मृत पेंशनभोगियों के खातों से लगभग 35 करोड़ रुपये की राशि वापस तो ली गई है, लेकिन इस मामले में अब भी कई अनियमितताओं की जांच जारी है. नियुक्तियों के मामले में भी डीवीसी के भीतर नियमों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लगे हैं. बिना किसी स्वीकृत पद के वर्ष 2026 में उत्पल गोस्वामी को सीधे सीनियर मैनेजर (रिन्यूएबल एनर्जी) के पद पर अवैध रूप से नियुक्त कर दिया गया. इसी तरह चेयरमैन की करीबी मानी जाने वाली श्रीमती अनन्या दत्ता चौधरी को सीनियर मैनेजर (एचआर) के पद पर अवैध नियुक्ति दी गई. इसके साथ ही, डीओपीटी और सीवीसी के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए डिप्टी जनरल मैनेजर और सीनियर मैनेजरों की नियुक्तियां की गईं तथा चेयरमैन, तीन बोर्ड सदस्यों और सीवीओ के लिए खरीदी गईं पांच गाड़ियों को बेहद मामूली शुल्क देकर अधिकारियों द्वारा स्वयं खरीद (बाय बैक) करने का एक अजीब और नियम विरुद्ध प्रस्ताव पास किया गया, जिसका पूरा ट्रांसफर खर्च भी डीवीसी द्वारा वहन किया जाना तय हुआ.



उच्च स्तरीय जांच आयोग गठन करने की मांग
डीवीसी में संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर की जा रही नियुक्तियों में भी पारदर्शिता की भारी कमी पाई गई है. दुर्गापुर के पूर्व मेयर, जो करीब 74 वर्ष के हैं, उन्हें विज्ञापन में तय 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का उल्लंघन करते हुए सीवीसी और जीएफआर-2005 के नियमों को दरकिनार कर एसोसिएट कंसलटेंट (सिविल-प्रशासन) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया गया. इस पद की जिम्मेदारियां पूरी तरह से नियमित प्रशासनिक नियंत्रण वाली हैं, जबकि नियमों के मुताबिक संविदा पर रखे गए सेवामुक्त कर्मचारी केवल सलाहकार की भूमिका निभा सकते हैं. इस चयन प्रक्रिया में न तो उम्मीदवारों की संख्या स्पष्ट की गई और न ही मूल्यांकन का कोई सही पैमाना अपनाया गया. उन्हें दिए जा रहे वित्तीय लाभ भी उनके अंतिम आहरित वेतन के बेहद करीब हैं, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है.इसके अतिरिक्त, प्रबंधन द्वारा 26 अन्य सलाहकारों की भी इसी तरह संदिग्ध नियुक्तियां की गई हैं. इन सभी गंभीर मामलों को संज्ञान में लेते हुए, सांसद दीपक प्रकाश ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से विनम्र अनुरोध किया है कि डीवीसी जैसे प्रतिष्ठित संगठन की साख बचाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाए.
उन्होंने मांग की है कि एक उच्च स्तरीय जांच आयोग का गठन कर इन सभी वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
31 मई को रिटायर्ड होंगे डीवीसी चेयरमैन
विदित हो कि डीवीसी के वर्तमान अध्यक्ष 31 मई को रिटायर्ड होंगे. जबकि डीवीसी के सदस्य वित्त डीवीसी अरूप सरकार 24 अप्रैल को अपना कार्यकाल डीवीसी में पूरा करने के बाद उन्हें उनके मूल संगठन, एनएसपीसीएल (NSPCL) में वापस भेज दिया गया है.
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