NewsWave Desk : अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक सैटेलाइट ने समुद्र की सतह पर बढ़ी हुई गर्मी को रिकॉर्ड किया है. ये गर्मी प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड की गयी है. वैज्ञानिकों ने इसे प्रबल अल नीनो की प्रक्रिया बताया है. नासा के सेंटिनल 6 माइकल फ्रेलिच सैटेलाइट से मिले डेटा से पता चला है कि भूमध्यरेखा के पास समुद्र का स्तर सामान्य से ज्यादा ऊंचा है. इसका मतलब है कि समुद्र के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है. प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में जब तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है और समुद्र की सतह ऊपर उठती है तो उसे अल नीनो कहा जाता है. समुद्र की सतह बढ़ने से यह भी समझ आता है कि नीचे कितनी गर्मी जमा है, क्योंकि गर्म पानी फैलता है और सतह ऊपर उठ जाती है.
भारत पर पड़ेगा अल नीनो का असर
अल नीनो का असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा. मौसम संगठनों का कहना है कि इससे कई देशों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. यह पिछले 150 सालों में सबसे मजबूत अल नीनो में से एक हो सकता है. इससे गर्मी बढ़ेगी और बारिश के पैटर्न में बदलाव आएगा. भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है. पहले से ही गर्मी का असर देखने को मिल रहा है और अगर मानसून कमजोर हुआ तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. जो लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की है.

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