Akshay Kumar Jha
Ranchi: बीजेपी दूसरी पार्टियों पर हमेशा से परिवारवाद का आरोप लगाते आयी है. चाहे वो केंद्रीय स्तर के पदाधिकारियों की बात हो या राज्य स्तर के. लेकिन, झारखंड बीजेपी में देखा जाए तो काफी बड़े स्तर पर परिवारवाद हावी है और लगातार बढ़ भी रहा है. बीजेपी के कार्यकर्ता झारखंड में पिछड़ने की मुख्य वजह परिवारवाद को मान रहे हैं. बड़े पदाधिकारियों के सगे-संबंधियों को पार्टी में पद मिलने से पुराने कार्यकर्ता काफी नाराज हैं. उनका मनोबल टूट रहा है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो बहुत जल्द पार्टी की हालत बद से बदतर हो सकती है.
विधानसभा चुनाव के दौरान मिले परिवारवाद के सबूत
पार्टी पदाधिकारियों से बात करने पर वो इस बात को नहीं कबूलते कि पार्टी में परिवारवाद हावी है. लेकिन इस बात के कई पक्के उदाहरण सामने आए हैं कि पार्टी में बड़े स्तर पर परिवारवाद हावी है. NewsWave आपको इसके कुछ उदाहरण बता रहा है.
पिछले विधानसभा चुनाव में ही परिवारवाद खुलकर देखने को मिला. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास चुनाव नहीं लड़ सके तो उन्होंने अपनी पुत्रवधु पूर्णिमा दास को बीजेपी की टिकट पर उतारा. हालांकि वो चुनाव जीत गयीं. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा पोटका से चुनाव लड़ीं और हार गयीं. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने अपने बेटे बाबूलाल सोरेन को घाटशिला से चुनाव लड़वाया, वो भी हार गए. ढुल्लु महतो सांसद बने तो अपने भाई शत्रुघ्न महतो को बाघमारा से चुनाव लड़वाया. हालांकि वो जीतने में कामयाब हुए. पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय के बेटे विक्रम पांडेय को टुंडी विधानसभा से चुनाव लड़ाया गया. वो हार गए. सीपी चौधरी खुद आजसू में रहते हुए अपने भाई रोशनलाल महतो को बीजेपी में शामिल कराया और बड़कागांव से चुनाव लड़वाया. उन्होंने जीत दर्ज की. इससे आजसू का प्रभाव बीजेपी पर कितना है, यह समझा जा सकता है.
बड़े पदाधिकारियों के सगे-संबंधियों को मिल रहा पद और प्रतिष्ठा
इस कैटेगरी में सबसे पहला नाम पूर्व मंत्री और मौजूदा रांची के विधायक सीपी सिंह का आता है. सीपी सिंह ने ताउम्र रांची विधानसभा सीट की ही राजनीति की. लेकिन, अपने बेटे अजीत सिंह को प्रदेश युवा मोर्चा पलामू प्रमंडल का प्रभारी बना दिया. हालात यह है कि अजीत सिंह से सीनियर नेता अब उनके अंदर काम कर रहे हैं.
पार्टी में उपाध्यक्ष पद पर काबिज राकेश प्रसाद के बेटे रिद्धि राज को रामगढ़ में उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी दी गयी है. अभी पूरा प्रदेश कमेटी घोषित भी नहीं हुआ है, लेकिन उनके बेटे को पांच महीने पहले ही जिम्मेदारी दे दी गयी.
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के बेटे को पार्टी में काफी प्रतिष्ठा और सम्मान देने की बात बीजेपी के कार्यकर्ता कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं का आरोप दीपक प्रकाश पर भी है. उनका कहना है कि उनके बेटे को भी पार्टी में काफी तवज्जो दी जा रही है.
जबकि हाल ही में जब NSUI ने बीजेपी कार्यालय को घेरने की कोशिश की तो इन वीआईपी नेताओं के सगे-संबंधियों को आगे नहीं किया गया, बल्कि पुराने कार्यकर्ताओं को ही आगे किया गया. मतलब काम पुराने कार्यकर्ताओं से लिया जा रहा है और तवज्जो वीआईपी नेताओं के सगे-संबंधियों को दी जा रही है.
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“ऐसा कोई भी मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है”- आदित्य साहू
इस मामले पर संवाददाता ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से बात की. उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर ऐसा कोई मामला हो तो बताइए. और अगर कहीं मंडल स्तर पर ऐसा हुआ होगा तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेरे कार्यकाल में ऐसा कोई मामला प्रदेश स्तर पर नहीं हुआ है.




