Ranchi : ऐसे तो 1 जुलाई 2024 से पुराने कानून व धाराओं को बदला दिया गया. इसके साथ ही देश में बीएनएस BNS और बीएनएसएस (भारतीय न्याय प्रणाली) BNSS को लागू किया गया. वहीं, 1 जुलाई 2026 से साइबर क्राइम को संगठित अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके साथ ही आतंकवाद को पहली बार परिभाषित किया गया. राजद्रोह कानून को पूरी तरह से खत्म करके देश की संप्रभुता को खतरे में डालने वाला नया कानून लागू किया गया है. जिसे देशद्रोह के रूप में परभाषित किया गया है. इसके अलावा मॉब लिंचिंग, संगठित अपराध और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए कई सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं.
मॉब लिंचिंग, महिला व बच्चों के खिलाफ अपराध के लिए सख्त धाराएं
इनमें मॉब लिंचिंग, संगठित अपराध, और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए कई सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं. जांच में देरी रोकने के लिए डिजिटल प्रक्रिया और समय-सीमा भी तय की गयी हैं. मॉब लिचिंग को गंभीर अपराध के रूप में जोड़ा गया है. इसमें उम्रकैद या मृत्युदंड तक के सजा का प्रावधान है. सामान्य आपराधिक कानून में पहली बार आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. छिनतई को भी पहली बार स्पष्ट अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है. साइबर कानून, फिरौती, जमीन पर कब्जा आदि को संगठित अपराध की श्रेणी में रखा गया है और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधन है. छोटे अपराधों के लिए जेल की सजा के बदले समुदाय सेवा (सफाई, पेड़ लगाना आदि) की नई सजा जोड़ी गई है. जिससे छोटे अपराध करने वाले को सुधरने का एक मौका मिले.

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