RANCHI: झारखंड की बिजली व्यवस्था अब पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि हाई-टेक ‘डिजिटल पहरेदारी’ और कड़े अनुशासन के साथ चलेगी. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य ग्रिड कोड विनियम, 2026 का मसौदा तैयार कर लिया है. यह नया कानून न केवल राज्य के बिजली नेटवर्क को बुलेटप्रूफ सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि साइबर हमलों से लेकर फ्रीक्वेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव तक, हर बारीक पहलू पर लगाम कसेगा.
ग्रिड की सेहत के लिए ‘डिजिटल कवच’
इस विनियम की सबसे खास बात इसका साइबर सुरक्षा संहिता है. पहली बार, स्टेट ग्रिड को स्पाइवेयर, मैलवेयर और हैकिंग से बचाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किया गया है. अब बिजली प्रणालियों का नियमित सुरक्षा ऑडिट होगा, ताकि कोई भी बाहरी घुसपैठ झारखंड की रोशनी न छीन सके.
ब्लैकआउट का डर खत्म, ‘स्पिनिंग रिजर्व’ रखेगा नजर
अक्सर ग्रिड फेल होने या फ्रीक्वेंसी गिरने से पूरा राज्य अंधेरे में डूब जाता था. लेकिन नए नियमों में स्पिनिंग रिजर्व और अंडर फ्रीक्वेंसी रिले जैसी तकनीकों को अनिवार्य किया गया है. यह एक ऐसी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है जो 50 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर सिंक्रनाइज़ रहेगी और जरूरत पड़ते ही पलक झपकते बिजली की कमी को पूरा कर देगी. अगर सिस्टम की फ्रीक्वेंसी तय सीमा से नीचे गिरती है, तो अंडर फ्रीक्वेंसी रिले और डीएफ व डीटी रिले तुरंत सक्रिय होकर ग्रिड को गिरने से बचा लेंगे.
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कई भागों में बंटा पावर प्रोटोकॉल
- कनेक्शन संहिता: ग्रिड से जुड़ने वाले हर नए खिलाड़ी (प्लांट) को सख्त तकनीकी मानकों को पूरा करना होगा.
- संचालन संहिता: सामान्य हो या आपातकाल, एसएलडीसी अब ग्रिड का सुप्रीम कमांडर होगा.
- वाणिज्यिक संहिता: बिजली के लेन-देन और हिसाब-किताब में अब पारदर्शिता आएगी, जिससे कंपनियों के बीच विवाद कम होंगे.
- ऊर्जा भंडारणः भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं.
किसे मिलेगा फायदा
यह विनियम झारखंड के संपूर्ण क्षेत्र पर प्रभावी होगा। इसमें जेएसइबी , डीवीसी व निजी बिजली उत्पादक और सौर-पवन ऊर्जा जैसे विक्रेता भी शामिल हैं. कैप्टिव पावर प्लांट चलाने वालों को भी अब इन सख्त मानकों का पालन करना होगा.
