Ranchi: झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले निर्माण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में झारखंड सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं, पर ये आंकड़े बेहद चौकाने वाले हैं. खास कर दो लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ, लेकिन सत्यापन के नाम पर सिर्फ 20 हजार को ही पहचान मिली है. राज्य में अब तक 28 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों और 2.21 लाख से अधिक प्रवासी कामगारों का पंजीकरण किया जा चुका है.
करोड़ों हाथों को पहचान की तलाश
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में निर्माण और असंगठित क्षेत्र के कुल अनुमोदित श्रमिकों की संख्या 28,23,377 तक पहुंच गई है. इनमें से 27,87,409 श्रमिकों के पास आधार उपलब्ध है.लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुल पंजीकृत श्रमिकों में से केवल 18,78,373 ही अब तक सत्यापित हो पाए हैं, जबकि 9,45,004 श्रमिक अभी भी सत्यापन की कतार में हैं.

कहीं उत्साह, कहीं सुस्ती
जिलों की बात करें तो पूर्वी सिंहभूम 3,76,089 श्रमिकों के साथ सूची में सबसे ऊपर है. लेकिन यहां सत्यापन की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है. वहीं, पलामू ने सत्यापन के मामले में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां 1.73 लाख श्रमिकों में से 1,68,799 का सत्यापन पूरा हो चुका है.दुमका जैसे जिलों में पंजीकृत श्रमिकों की बड़ी संख्या होने के बावजूद सत्यापित श्रमिकों का आंकड़ा तुलनात्मक रूप से कम है, जो प्रशासनिक गति बढ़ाने की ओर इशारा करता है.
प्रवासी श्रमिकों का डेटा
राज्य सरकार ने पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों’ का भी डेटा साझा किया है.राज्य में कुल 2,21,677 प्रवासी श्रमिक पंजीकृत हैं. कुल प्रवासियों में 1,61,860 पुरुष, 59,252 महिला और 565 ट्रांसजेंडर श्रमिक शामिल हैं. प्रवासी श्रमिकों के मामले में सत्यापन की स्थिति काफी नाजुक है. कुल 2.21 लाख श्रमिकों में से मात्र 20,515 का सत्यापन हुआ है, जबकि 2,00,907 श्रमिक अभी भी गैर-सत्यापित श्रेणी में हैं. प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण में गिरिडीह (20,839), दुमका (17,934) और गोड्डा (17,613) सबसे आगे हैं. इन जिलों के श्रमिक बड़ी संख्या में आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं.
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