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औब्सेसिव पेरेंटिंग: बच्चों पर ज़्यादा कंट्रोल करना सही या गलत?

NewsWave Desk: औब्सेसिव पेरेंटिंग वह परवरिश है जिसमें माता-पिता बच्चों की पढ़ाई, एक्टिविटी और भविष्य को लेकर जरूरत से ज़्यादा चिंता करते...

NewsWave Desk: औब्सेसिव पेरेंटिंग वह परवरिश है जिसमें माता-पिता बच्चों की पढ़ाई, एक्टिविटी और भविष्य को लेकर जरूरत से ज़्यादा चिंता करते हैं. वे हर काम में दखल देते हैं और बच्चों से हमेशा परफेक्शन की उम्मीद करते हैं. इसी वजह से इसे हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग भी कहा जाता है.

फायदे क्या हैं?

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इस पेरेंटिंग से बच्चों में अनुशासन, समय की समझ और मेहनत करने की आदत आ जाती है. माता-पिता का गाइडेंस बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से भी रोकता है और उनकी खूबियों को निखारता है.

नुकसान भी हैं

अगर माता-पिता की चिंता हद से ज़्यादा हो जाए तो बच्चे की आज़ादी कम हो जाती है. इससे बच्चों का आत्मविश्वास कम हो जाता है और वे हर वक्त तनाव में रहने लगते हैं. हमेशा परफेक्शन की उम्मीद रखने से बच्चों को चिंता, डिप्रेशन और भावनात्मक परेशानियां हो सकती हैं.

संतुलन है ज़रूरी

माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों की पसंद और रुचियों को समझें, उनका साथ दें और अपनी इच्छाएं या सपने उन पर ज़बरदस्ती न थोपें. सख्ती और आज़ादी के बीच का संतुलन बच्चों को आत्मनिर्भर और खुश बनाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही गाइडेंस और प्यार से बच्चे न सिर्फ सफल, बल्कि मजबूत और खुशहाल भी बन सकते हैं.

 

 

 

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