Click Here
Click Here
Click Here
Click Here
Click Here

विश्व आदिवासी दिवस पर राज्यपाल बोले- आदिवासी समाज ने दुनिया को प्रकृति बचाने का दिखाया रास्ता, छात्रों की समस्याओं का बातचीत से होगा समाधान

Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और संघर्ष को याद किया....

World Tribal Day
विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम में मौजूद सीएम हेमंत सोरेन व राज्यपाल

Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और संघर्ष को याद किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि उसकी रक्षा और संवर्धन किया है. आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन से परेशान है. ऐसे समय में आदिवासी समाज की जीवनशैली पूरी मानवता को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की सीख देती है. राज्यपाल ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज का योगदान बहुत बड़ा रहा है. भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, वीर बुधु भगत, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और जतरा उरांव जैसे अनेक वीरों ने देश और अपनी मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.

शिबू सोरेन को भी किया याद

राज्यपाल ने दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी याद किया. उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य के रूप में लंबे समय तक शिबू सोरेन के साथ काम करने का मौका मिला. वे बेहद सरल, सहज और विनम्र नेता थे. उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकार और सम्मान के लिए लगातार संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान, यहां के लोगों के अधिकार और राज्य निर्माण में शिबू सोरेन का योगदान हमेशा याद किया जाएगा. केंद्र सरकार ने उनके योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया. इस दौरान राज्यपाल द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई.

झारखंड में 25 फीसदी आबादी आदिवासियों की

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की करीब 25 प्रतिशत आबादी आदिवासी समाज की है. राज्य में 32 प्रकार की अनुसूचित जनजातियां और 8 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है. आदिवासी समाज अपनी कला, संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों से देश की विविधता को मजबूत कर रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने राज्य के कई दूरदराज और आदिवासी इलाकों का दौरा किया. वहां लोगों से मिलने के बाद उन्होंने महसूस किया कि आदिवासी समाज मेहनती, ईमानदार, स्वाभिमानी और प्रकृति का सम्मान करने वाला समाज है.

शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में अभी और काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की कई अच्छी परंपराएं पूरे समाज के लिए सीख है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में दहेज जैसी कुरीतियों का कम होना सकारात्मक बात है. वहीं डायन प्रथा और अंधविश्वास जैसी बुराइयों को शिक्षा और जागरूकता के जरिए खत्म करने की जरूरत है.

बच्चों से बोले- शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाएं

राज्यपाल ने आदिवासी समाज के बच्चों से शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि शिक्षा से आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में बदलाव आता है. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचीं.

प्रधानमंत्री की योजनाओं का किया जिक्र

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर 2024 को हजारीबाग से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत की गई. इसका उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों का तेजी से विकास करना है. उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलीहातू का भी जिक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री वहां पहुंचकर विकास योजनाओं की शुरुआत कर चुके हैं.

पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की खास जिम्मेदारी

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल राज्य है. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन और आदिवासी समाज की सुरक्षा एवं कल्याण को लेकर राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

आंदोलन कर रहे छात्रों से बोले- बातचीत से निकालें समाधान

JPSC-JSSC की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री छात्रों की समस्याओं को लेकर चिंतित हैं और लगातार समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपील की, कि वे बातचीत के जरिए अपनी समस्या का समाधान निकालें. उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहती. छात्र मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखें. बातचीत के बाद जो समाधान निकलेगा, उसका स्वागत किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर छात्र राज्यपाल से भी मिल सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि छात्रों को शिकायत का मौका नहीं मिले और झारखंड विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे.

यह भी पढ़ें: चाईबासा: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मेरठ से तीन लापता लड़कियां सकुशल बरामद

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *