palamu: पलामू जिले के बसना गांव में इन दिनों प्रकृति का एक अनोखा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां एक बागान आज भी रसीले आमों की भीनी-भीनी खुशबू और बेमिसाल स्वाद से सराबोर है. इस अनूठे बागान में एक-दो नहीं, बल्कि आमों की 40 से भी अधिक दुर्लभ और विशेष प्रजातियां मौजूद हैं. इस समय पूरे इलाके में यहां का ‘तोतापरी’ आम अपनी खास रंगत, लाजवाब स्वाद, बेहतरीन गुणवत्ता और उच्च पोषण क्षमता के कारण लोगों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. भोर की पहली किरण के साथ ही बड़ी संख्या में फल प्रेमी और स्थानीय लोग इस बागान में पहुंच रहे हैं ताकि सीधे पेड़ों से टूटे ताजे और शुद्ध आमों के स्वाद का आनंद ले सकें.
इसमें रेशा (फाइबर) नाममात्र का होता है
इस खूबसूरत और लहलहाते बागान को अपने खून-पसीने से सींचने वाले बसना गांव के प्रगतिशील किसान सतीश दुबे का पेड़-पौधों से बचपन का गहरा नाता रहा है. इसी अटूट लगाव और कुछ नया करने की चाह ने उन्हें आम की विभिन्न किस्मों को सहेजने के लिए प्रेरित किया. तोतापरी आम की खासियत बताते हुए वे कहते हैं कि इसमें रेशा (फाइबर) नाममात्र का होता है और गूदा अत्यधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण इसका पोषण मूल्य अन्य आमों की तुलना में काफी बेहतर है. इस खास किस्म की कहानी साझा करते हुए सतीश दुबे बताते हैं कि एक बार वे उत्तर प्रदेश के बहराइच गए थे, जहां उन्हें किसी ने यह आम चखने के लिए दिया था. इसका स्वाद उनकी जुबान पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने तुरंत फैसला कर लिया कि वे इस बेहतरीन किस्म की खेती पलामू में अपने बागान में जरूर करेंगे और वे बहराइच से इसके पौधे ले आए.

व्यावसायिक खेती के रूप में मुनाफे का एक बड़ा जरिया
व्यावसायिक दृष्टि से भी यह आम किसानों की तकदीर बदलने की पूरी क्षमता रखता है. सतीश दुबे के अनुसार, तोतापरी आम का पौधा रोपने के मात्र तीन से चार वर्षों के भीतर ही भरपूर फल देना शुरू कर देता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान में उनके बागान के पेड़ महज छह फीट ऊंचे हैं, जबकि सिर्फ चार फीट की जमीनी ऊंचाई से ही इनमें बड़े-बड़े फल लटकने शुरू हो जाते हैं. पेड़ों की ऊंचाई बेहद कम होने के कारण इनकी रासायनिक और जैविक देखभाल करना, कीटों से बचाना और पके हुए फलों की सुरक्षित तुड़ाई करना बेहद आसान और किफायती हो जाता है. कम लागत और आसान रख-रखाव के कारण तोतापरी आम की यह उन्नत किस्म अब पलामू और आस-पास के अन्य किसानों के लिए भी व्यावसायिक खेती के रूप में मुनाफे का एक बड़ा जरिया साबित हो सकती है.


