पलामू: ‘धर्मेंद्र प्रधान को बचाना बंद करे मोदी सरकार’-गोपाल सिंह

Palamu: जिला कांग्रेस प्रवक्ता सह मीडिया चेयरमैन गोपाल सिंह ने NEET परीक्षा से जुड़े कथित विवादों और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार...

पलामू
गोपाल सिंह, जिला कांग्रेस प्रवक्ता

Palamu: जिला कांग्रेस प्रवक्ता सह मीडिया चेयरमैन गोपाल सिंह ने NEET परीक्षा से जुड़े कथित विवादों और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस प्रकरण ने करोड़ों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है. वर्षों की मेहनत और तैयारी करने वाले लाखों विद्यार्थियों के सपनों को गहरा आघात पहुंचा है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले की जवाबदेही से बच नहीं सकती और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक आधार पर अपने पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं. कांग्रेस ने उनसे तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है.

छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस

गोपाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है. संसद से लेकर सड़क तक पार्टी इस मुद्दे को मजबूती से उठा रही है, उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार छात्रों की आवाज बनकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और स्पष्ट कर चुके हैं कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा. शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है.

जंतर-मंतर आंदोलन का किया समर्थन

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. कांग्रेस ने इस आंदोलन का समर्थन किया है, गोपाल सिंह ने दावा किया कि देशभर में लाखों युवा पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संवेदनहीन बनी हुई है और युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज को अनसुना कर रही है.

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सरकार पर विफलताओं को छिपाने का आरोप

गोपाल सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय शिक्षा मंत्री को बचाने में लगी हुई है. उन्होंने कहा कि देश का युवा न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है. शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठे सवालों से सरकार अब अधिक समय तक मुंह नहीं मोड़ सकती.

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