Palamu : पलामू के रहने वाले कमलेश कुमार सिंह द्वारा जनहित के विभिन्न गंभीर मुद्दों पर की गई शिकायतों पर कार्रवाई न होने का एक बड़ा मामला सामने आया है. लगातार मिल रही उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने मतदाता सूची से अपना नाम हटाने तक का अनुरोध कर डाला है. इस बीच, प्रधानमंत्री जन शिकायत पोर्टल पर दर्ज उनकी शिकायत को प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय को भेज दिया है, जो फिलहाल प्रक्रियाधीन है. इससे पहले राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल पर दर्ज उनकी एक शिकायत को संबंधित विभाग द्वारा बिना किसी ठोस समाधान के बंद कर दिया गया था. उस शिकायत के जवाब में केवल ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करने की बात कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया था, जिससे नाराज होकर कमलेश सिंह ने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.
शिकायतों में उठाए गए मुख्य मुद्दे, कमलेश सिंह द्वारा उठाई गई
शिकायतों में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे शामिल हैं. पहला मुद्दा एशिया के सबसे बड़े कुंदरी लाह बागान को दोबारा जीवित करने का है. वे पिछले 13 वर्षों से इस ऐतिहासिक बागान को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यावरण का संरक्षण हो सके, लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. दूसरा मुद्दा वन विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के उपेक्षापूर्ण रवैये से जुड़ा है. उन्होंने शिकायत में वन विभाग द्वारा लगाए गए बेबुनियाद आरोपों से मानसिक प्रताड़ना मिलने की बात कही है और क्षेत्र में वनों की अवैध कटाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है. तीसरा मामला शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें रांची के विवेकानंद विद्या मंदिर में नियमों की अनदेखी, मनमानी फीस वृद्धि और जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन न होने का आरोप लगाया गया है. इस वजह से उनकी पुत्री के नामांकन में देरी हुई और उसके शैक्षणिक भविष्य पर बुरा असर पड़ा है.

व्यवस्था से निराश होकर लिया बड़ा फैसला
लगातार मिल रही निराशा के बाद ही उन्होंने आहत होकर मतदाता सूची से अपना नाम हटाने का अनुरोध संबंधित अधिकारियों से किया है. उनका मानना है कि जब जनहित के महत्वपूर्ण मामलों पर वर्षों तक कोई सुनवाई ही नहीं होनी है, तो ऐसे में नागरिक अधिकारों का कोई महत्व नहीं रह जाता. कमलेश सिंह का कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों की शिकायतों का समय पर और निष्पक्ष समाधान होना चाहिए. केवल शिकायत को बंद कर देना या दूसरे कार्यालय जाने की सलाह देना कोई समाधान नहीं है. सरकार को इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. अब उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई शिकायत पर तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष और प्रभावी निर्णय लिया जाएगा, जिससे इन जनहित के मुद्दों का जल्द से जल्द स्थायी समाधान हो सके.
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