Hazaribagh: भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव के बीच आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की खोज में जुटे हजारीबाग के लोगों के लिए पिछला तीन दिन बेहद खास रहा. आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में शहर के प्रसिद्ध ‘तथास्तु’ रिसॉर्ट में आयोजित तीन दिवसीय उन्नत ध्यान शिविर का आज भव्य और गरिमामयी समापन हो गया. आर्ट ऑफ लिविंग के मूल ‘हैप्पीनेस प्रोग्राम’ को पूरा करने वाले साधकों के लिए यह एडवांस कोर्स जीवन का अगला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, जिसमें लोगों ने अपनी अंतरात्मा से जुड़ने का अद्भुत अनुभव प्राप्त किया.
पूर्ण मौन और सात्विक आहार के बीच चेतना का विस्तार
हजारीबाग जिला शिक्षक समन्वयक तारकेश्वर सोनी ने शिविर की सफलता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस तीन दिवसीय साधना में शामिल सभी साधकों ने प्रकृति की गोद में रहते हुए पूर्णतः ‘मौन व्रत’ का पालन किया. मोबाइल और बाहरी दुनिया के कोलाहल से दूर, साधकों ने सात्विक आहार-विहार को अपनाया और हल्के आसन व प्राणायाम के जरिए गहरे ध्यान की ओर उन्मुख हुए. इस अनूठे प्रयोग ने साधकों की मानसिक और आत्मिक चेतना को गहरे रूप से प्रभावित किया, जिससे उन्हें आंतरिक शांति और परम आनंद की अनुभूति हुई.

विश्व विख्यात योग गुरुओं से मिला गोपनीय विद्याओं का ज्ञान
इस शिविर की विशेषता यह रही कि इसमें साधकों को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रख्यात शिक्षक दिनेश गोंडके तथा खुर्शीद बाटलीवाला का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. इन वैश्विक स्तर के प्रशिक्षकों के माध्यम से हजारीबाग के लोगों को ध्यान के सबसे गहरे और दुर्लभ अनुभवों को प्राप्त करने का सौभाग्य मिला. शिविर के दौरान साधकों ने योग की उन अन्य प्रमुख और गोपनीय समझी जाने वाली प्राचीन विधाओं का साक्षात् और व्यावहारिक अनुभव किया, जो जीवन को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती हैं.
रांची से आए ऋषियों ने संभाली कमान, आयोजकों ने निभाई अहम भूमिका
इस उच्च स्तरीय ध्यान शिविर को सफलतापूर्वक संचालित करने में रांची से विशेष रूप से पधारे ऋषि अजातशत्रु एवं हजारीबाग के तारकेश्वर सोनी द्वारा पूरी तन्मयता से सहयोग किया गया. वहीं, पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और अनुशासित ढंग से संपन्न कराने में मुख्य ऑर्गनाइजर रौनक ग्रोवर एवं पूजा ग्रोवर ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए विधि-व्यवस्था के तमाम दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया. शिविर के समापन पर सभी साधकों के चेहरों पर एक अनोखी चमक, शांति और संतोष का भाव साफ देखा जा सकता था. प्रतिभागियों ने कहा कि यह तीन दिन उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित होंगे, जो उन्हें समाज में एक नई ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा देंगे.
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