Hazaribagh : एक ओर सरकार और स्वास्थ्य विभाग बायो मेडिकल वेस्ट के 48 घंटे के भीतर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण का दावा करते हैं, वहीं हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में यह दावा पूरी तरह खोखला साबित होता दिख रहा है. अस्पताल परिसर में पिछले चार दिनों से बायो मेडिकल कचरा खुले में पड़ा है और उसे आवारा कुत्ते नोचते नजर आ रहे हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है.
नियमों को ताक पर रखकर फैलाया जा रहा संक्रमण का खतरा
बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुसार अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित कचरे का 48 घंटे के भीतर सुरक्षित निस्तारण अनिवार्य है. लेकिन अस्पताल परिसर में चार दिनों से जमा कचरा यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित क्यों हैं? यदि यही स्थिति रही तो अस्पताल खुद बीमारियों का केंद्र बन सकता है.

कुत्ते नोच रहे मेडिकल वेस्ट, मरीजों और राहगीरों पर मंडरा रहा खतरा
खुले में पड़े मेडिकल कचरे में इस्तेमाल की गई पट्टियां, सिरिंज, संक्रमित सामग्री और अन्य जैविक अपशिष्ट शामिल हैं. इन्हें आवारा कुत्ते इधर-उधर खींच रहे हैं. इससे संक्रमण फैलने के साथ-साथ अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और आसपास के लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है.
बारिश ने बढ़ाई चिंता, प्रदूषण और संक्रमण दोनों का खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण मेडिकल कचरे से निकलने वाले संक्रमित तत्व मिट्टी और नालियों में मिल सकते हैं. इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी लापरवाही सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर साबित हो सकती है.
जिम्मेदार कौन? सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था
अस्पताल से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट निकलता है, जिसे अधिकृत एजेंसी के माध्यम से समय पर उठाया जाना चाहिए. लेकिन चार दिनों तक कचरा नहीं उठना यह दर्शाता है कि निगरानी व्यवस्था पूरी तरह सुस्त है. सवाल यह भी है कि जब नियमों का पालन नहीं हो रहा था तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित रखना है, लेकिन जब अस्पताल परिसर ही संक्रमण का स्रोत बनने लगे तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है. जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, मेडिकल वेस्ट का तत्काल वैज्ञानिक निस्तारण कराया जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए.
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