Bokaro: विश्व आदिवासी महोत्सव के अवसर पर मंत्री, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, झारखंड सरकार योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का संदेश देती है. जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में आदिवासी समाज की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है.उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, पहचान, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति संकल्प लेने का दिन है. आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है.

पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि आदिवासी समाज ने हमेशा प्रकृति को सम्मान दिया है. आज पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसे समय में आदिवासी समाज की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण से सीख लेने की आवश्यकता है.उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है. समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है. गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं.

संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. आदिवासी महोत्सव जैसे आयोजन हमारी समृद्ध विरासत को जानने, समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.मंत्री ने सभी को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी मिलकर जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लें तथा झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत को और मजबूत बनाएं.

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