Ranchi: आगामी श्रावणी मेले को लेकर झारखंड के पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिसकर्मियों की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द किए जाने के फैसले से जवानों में नाराजगी और मानसिक तनाव देखा जा रहा है. लगातार ड्यूटी के दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अचानक छुट्टी रद्द होने से पुलिसकर्मी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं. कई जवानों का कहना है कि इस फैसले से उनके व्यक्तिगत जीवन पर गहरा असर पड़ेगा, जिससे मानसिक तनाव और बढ़ सकता है.
लगातार ड्यूटी और मानसिक तनाव
श्रावणी मेले में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर साल बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती की जाती है. इस वर्ष भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत जिला पुलिस से लेकर विशेष बलों तक के पुलिसकर्मियों की छुट्टियां अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं. पुलिसकर्मियों का तर्क है कि वे पहले से ही कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं. ऐसे में बिना किसी राहत के लगातार ड्यूटी करने से वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके हैं. अचानक छुट्टी रद्द होने के फैसले ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है.

नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया, “हमें भी परिवार की जिम्मेदारियां निभानी होती हैं. बच्चों के स्कूल में दाखिले, बुजुर्ग माता-पिता के इलाज और सामाजिक दायित्वों के लिए इस समय छुट्टी की जरूरत थी. कई महीनों पहले से तय पारिवारिक शादियां और अन्य जरूरी काम इस आदेश के कारण प्रभावित हो गए हैं.” जवानों का कहना है कि जब वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पाते हैं, तो इससे उनके भीतर असंतोष और तनाव बढ़ता है. चौबीसों घंटे तनावपूर्ण माहौल में ड्यूटी करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है.

आपातकालीन छुट्टी की व्यवस्था की मांग
पुलिस संगठनों और कुछ अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य है, लेकिन जवानों की मानसिक स्थिति की अनदेखी भी उचित नहीं है. उनका कहना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में छुट्टी देने की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पुलिसकर्मी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और ड्यूटी के बीच संतुलन बना सकें.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने क्या कहा
इस मामले पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मुर्मू ने कहा कि राज्य में पुलिसकर्मियों की भारी कमी है. यदि स्वीकृत पदों के अनुसार सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां हो जाती हैं, तो छुट्टियों के लिए रोटेशन की व्यवस्था लागू की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी छुट्टी का भी ध्यान रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर राहत दी जाती है.
ALSO READ: जामताड़ा : तालाब जीर्णोद्धार बना किसानों के लिए मुसीबत, खेतों में जलभराव से धान रोपाई प्रभावित

