Ranchi: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कल यानी 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है. प्रशासनिक गलियारों में इस बैठक को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है जब राज्य के युवा और अभ्यर्थी भविष्य की अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं.

प्रतियोगी परीक्षाओं की रद्दीकरण पर हाई कोर्ट की रोक और सरकार का मंथन
पूर्व में राज्य सरकार द्वारा एक विशेष कैबिनेट बैठक के जरिए कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया था. सरकार के इस अचानक लिए गए निर्णय से रातों-रात अपनी नौकरी गंवाने वाले हजारों कर्मचारियों और चयनित अभ्यर्थियों पर गहरा संकट आ गया था. इस फैसले के विरोध में आक्रोशित अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और न्याय की गुहार लगाते हुए झारखंड हाई कोर्टका दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसके तहत परीक्षाएं और चयन प्रक्रिया रद्द की गई थी. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इस कानूनी पेच और हाई कोर्ट के रुख को लेकर आज सोमवार को उच्च स्तर पर गहन मंथन किया जाएगा, और कल होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर कोई ठोस कानूनी रणनीति तय की जा सकती है.
जेपीएससी के खाली पदों और प्रशासनिक नियुक्तियों पर नजर
इस कैबिनेट बैठक का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बिंदु झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में खाली पड़े शीर्ष पदों को भरना हो सकता है. आयोग में अध्यक्ष पद पर एल. खियांग्ते और सदस्य पद पर अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा तथा जमाल अहमद के इस्तीफे के बाद से ये तमाम महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हुए हैं. आयोग के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और अटकी हुई नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति देने के लिए कैबिनेट इन पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति को हरी झंडी दिखा सकती है.
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