पॉलिटेक्निक कॉलेज गुमला: तकनीकी शिक्षा के माध्यम से बदल रही जिले की पहचान

Gumla:जिला कभी नक्सली गतिविधियों, पिछड़ेपन और सीमित विकास के कारण चर्चा में रहता था. लंबे समय तक यह क्षेत्र शिक्षा, रोजगार और...

Gumla:जिला कभी नक्सली गतिविधियों, पिछड़ेपन और सीमित विकास के कारण चर्चा में रहता था. लंबे समय तक यह क्षेत्र शिक्षा, रोजगार और औद्योगिक अवसरों की कमी से जूझता रहा. विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों के युवाओं के सामने बेहतर शिक्षा और रोजगार प्राप्त करने की बड़ी चुनौती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गुमला की तस्वीर तेजी से बदली है. इस बदलाव में तकनीकी शिक्षा संस्थानों, विशेषकर पॉलिटेक्निक कॉलेज गुमला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. आज यह संस्थान जिले की सकारात्मक पहचान बनाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने में अहम योगदान दे रहा है.

जरूरतों के हिसाब से कौशल सिखाया जाता है 

कॉलेज में विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र की आधुनिक जानकारी दी जा रही है. यहां विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण, प्रयोगशाला कार्य और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कौशल भी सिखाया जाता है. यही कारण है कि यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्र रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप तैयार होते हैं.

बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना 

पॉलिटेक्निक कॉलेज गुमला के निर्देशक अभिजीत कुमार का मानना है कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य जिले के प्रत्येक शिक्षित युवक और युवती को तकनीकी शिक्षा से जोड़ना और उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. उनके अनुसार, केवल डिग्री देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करना अधिक महत्वपूर्ण है.

सामाजिक ऑर संस्कृति महत्वपूर्ण हिस्सा 

इसके साथ ही झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी परंपराओं और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया जाता है. टाना भगत समुदाय झारखंड के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह समुदाय अपनी सादगी,अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के लिए जाना जाता है. पॉलिटेक्निक कॉलेज गुमला में इस समुदाय के युवक-युवतियों को भी तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है. इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और वे रोजगार के नए अवसरों से जुड़ रहे हैं.

इसी प्रकार आदिवासी समुदाय के अनेक छात्र-छात्राएं भी तकनीकी शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं. शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ने से सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिली है.

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