News Wave Desk: बिहार की सियासत में एक बार फिर भूचाल आने वाला है. कभी पर्दे के पीछे रहकर बड़े-बड़े दिग्गजों को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाने वाले ‘चुनावी चाणक्य’ प्रशांत किशोर (पीके) अब खुद चुनावी अखाड़े में ताल ठोकने की तैयारी कर चुके हैं. भाजपा का सबसे अभेद्य किला माने जाने वाले पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव ने सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि वह भाजपा के इस गढ़ में घुसकर उसके ‘अहंकार का गुब्बारा’ पंक्चर करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अब यह मुकाबला सिर्फ एक अदद सीट का नहीं, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति का टर्निंग पॉइंट बनने जा रहा है.

भाजपा के ‘सेफेस्ट जोन’ में पीके की सर्जिकल स्ट्राइक!
बांकीपुर विधानसभा सीट दशकों से भाजपा का वो गढ़ रही है, जिसे हिला पाना किसी भी विरोधी दल के लिए नामुमकिन सा रहा है. नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर अमूमन भाजपा अपनी जीत तय मानकर चलती है. लेकिन इस बार कहानी बदल चुकी है. प्रशांत किशोर ने जानबूझकर इस ‘सेफ सीट’ को चुना है. जन सुराज का सीधा गणित है कि अगर भाजपा को उसके सबसे मजबूत किले में मात दे दी, तो पूरे बिहार में यह संदेश जाएगा कि ‘भगवा ब्रिगेड’ को पटखनी दी जा सकती है.
स्लम एरिया और जमीनी फीडबैक के भरोसे ‘पीके’ का दांव
जन सुराज के सूत्रों की मानें तो पार्टी ने बांकीपुर के 114 स्लम एरिया (मलिन बस्तियों) में से 64 इलाकों का सघन दौरा कर जमीनी फीडबैक जुटाया है. जनता के बीच से यह आवाज आई है कि अगर प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरते हैं, तो इस बार बदलाव तय है. इस चुनाव को नीतीश सरकार के पहले साल के कामकाज पर ‘रेफरेंडम’ यानी जनमत संग्रह के तौर पर भी देखा जा रहा है. प्रशांत किशोर का यह आक्रामक स्टैंड दिखाता है कि वे सिर्फ वोट काटने नहीं, बल्कि भाजपा के तिलस्म को सीधे नेस्तनाबूत करने के इरादे से उतर रहे हैं.
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जेडीयू-आरजेडी के साख की अंतिम परीक्षा
प्रशांत किशोर के इस सीधे हमले से सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि लालू यादव की आरजेडी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू के भी तोते उड़ गए हैं. हालांकि, जेडीयू नेता अशोक चौधरी तंज कसते हुए इसे मीडिया हाइप बता रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अंदरखाने सब डरे हुए हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था, जहां पार्टी के कई उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी. ऐसे में बांकीपुर का यह उपचुनाव प्रशांत किशोर के अपने राजनीतिक वजूद और ‘जन सुराज’ की साख की अंतिम परीक्षा है.


