Click Here
Click Here
Click Here

संयुक्त सचिव को गाड़ी वापस मांगने का अधिकार नहीं, DGP को दो पत्र लिखे फिर भी जवाब नहीं मिला, लड़ाई जारी रहेगी अभी: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर

Ranchi: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रशासनिक कार्यशैली और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि...

The Joint Secretary has no right to ask for the vehicle back. He wrote two letters to the DGP but still received no response. The fight will continue: Finance Minister Radhakrishna Kishore

Ranchi: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रशासनिक कार्यशैली और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि एक संयुक्त सचिव (Joint Secretary) को मंत्री को आवंटित सरकारी वाहन वापस मांगने का अधिकार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनसे गाड़ी लौटाने को कहा गया. उन्होंने इसे प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ बताया. वित्त मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने डीजीपी को दो बार पत्र लिखा, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा कि डीजीपी मंत्रालय से ऊपर नहीं हैं और मंत्री द्वारा भेजे गए पत्रों पर समय पर कार्रवाई होनी चाहिए थी.

यह भी पढ़ें: छात्रों की गूंज कार्यक्रम में के. राजू का आह्वान, युवाओं को सौंपी लोकतंत्र की कमान, कहा- ‘संविधान पर खतरा, युवाओं का जागना जरूरी’

‘प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह अनुचित’

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी (सिक्योरिटी गार्ड) की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन से मांग की थी, लेकिन उस पर भी कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह अनुचित है और जनप्रतिनिधियों के प्रति इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. वित्त मंत्री ने कांग्रेस के तीन मंत्रियों द्वारा हाल में उठाए गए सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे पूरी तरह पढ़ना और समझना जरूरी होता है. बिना तथ्यों को देखे और नियमों को समझे हस्ताक्षर करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा, “फाइल पढ़ने में समय लगता है, उसके बाद ही उस पर हस्ताक्षर किए जाते हैं. अगर बिना पढ़े ही साइन करना है तो अभी कर देते हैं, लेकिन यह प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है.” राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि मंत्री का दायित्व केवल हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि हर निर्णय के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को समझकर फैसला लेना है. उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नियमों का पालन आवश्यक है.

यह भी पढ़ें: FIFA World Cup 2026: एमबाप्पे के गोल से फ्रांस क्वार्टर फाइनल में, पराग्वे ने आखिरी दम तक दी चुनौती, मोरक्को ने मेजबान कनाडा का सपना तोड़ा

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *