News Wave Desk : भारत की रक्षा ताकत लगातार मजबूत हो रही है.अब देश ने स्वदेशी लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ का सफल परीक्षण कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है, यह सिस्टम 300 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को बेहद सटीकता से निशाना बना सकता है, ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में पुणे की रक्षा कंपनी निबे लिमिटेड ने इसका सफल परीक्षण किया. इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की स्वदेशी सैन्य क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है.

₹293 करोड़ का रक्षा सौदा
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय सेना ने सूर्यास्त्र सिस्टम के लिए लगभग ₹293 करोड़ का आपातकालीन खरीद समझौता किया है. हालांकि यह रकम सिर्फ एक रॉकेट की कीमत नहीं है। इसमें लॉन्चर सिस्टम, सपोर्ट उपकरण, कंट्रोल सिस्टम और ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हैं.
एक सूर्यास्त्र रॉकेट की कीमत कितनी?
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 300 किलोमीटर रेंज वाले एक गाइडेड सूर्यास्त्र रॉकेट की अनुमानित कीमत लगभग ₹50 लाख से ₹2.3 करोड़ के बीच हो सकती है. कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि रॉकेट में कौन-सा गाइडेंस सिस्टम, पेलोड और टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है.
मिसाइलों से काफी सस्ता विकल्प
बताया जा रहा है कि सूर्यास्त्र रॉकेट पारंपरिक क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ता है. कुछ रिपोर्ट्स में इसे बड़ी मिसाइलों की लागत के लगभग 15वें हिस्से जितना बताया गया है. यही वजह है कि युद्ध जैसी स्थिति में सेना एक साथ बड़ी संख्या में इन रॉकेट्स का इस्तेमाल कर सकती है.
दो रेंज वेरिएंट में तैयार
सूर्यास्त्र सिस्टम को दो अलग-अलग रेंज में विकसित किया गया है:
150 किलोमीटर रेंज वाला वेरिएंट
300 किलोमीटर रेंज वाला लंबी दूरी का वेरिएंट
इससे सेना जरूरत के हिसाब से अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकेगी।
एक लॉन्चर से कई तरह के रॉकेट फायर
सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-कैलिबर क्षमता मानी जा रही है. यानि एक ही लॉन्चर प्लेटफॉर्म से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और गाइडेड गोला-बारूद दागे जा सकते हैं. इससे सेना को अलग-अलग हथियारों के लिए अलग लॉन्च सिस्टम रखने की जरूरत कम पड़ती है और लॉजिस्टिक्स आसान हो जाते हैं.
भारत की रक्षा शक्ति को बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञ मानते हैं कि सूर्यास्त्र जैसे स्वदेशी सिस्टम भारत को लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता देने के साथ-साथ रक्षा आयात पर निर्भरता भी कम करेंगे, यह सिस्टम भविष्य में भारतीय सेना की रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को नई मजबूती दे सकता है.
