Ranchi: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन चुकीं सहिया धरातल पर मूक क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं. राज्य के सुदूर गांवों और टोलों तक चिकित्सीय देखभाल, मातृत्व सुरक्षा और शिशु स्वास्थ्य को पहुंचाने में सहिया कार्यक्रम के आंकड़े इसकी अभूतपूर्व सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं. आधिकारिक तौर पर अपडेट किए गए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि राज्य के लाखों परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो चुकी है.

मजबूत बुनियादी ढांचा और परिवार पंजीकरण
कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक पहुंच है. राज्य में अब तक 48 लाख 9 हजार 191 से अधिक परिवारों का पंजीकरण किया जा चुका है. सुरक्षित मातृत्व और परिवार नियोजन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 18 लाख 33 हजार 674 से अधिक योग्य दंपतियों को चिन्हित किया गया है. वहीं, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए 2 लाख 46 हजार 562 से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उनकी नियमित ट्रैकिंग की जा रही है.
शिशु स्वास्थ्य और होम बेस्ड नवजात देखभाल
नवजात शिशुओं की जिंदगी बचाने में होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर योजना गेम-चेंजर साबित हुई है. इसके तहत सहियाओं ने रिकॉर्ड 23 लाख 5 हजार 338 से अधिक नवजात बच्चों की घर पर ही देखभाल की है. इसके अलावा, 4 लाख 37 हजार 970 से अधिक बच्चों का नया पंजीकरण हुआ है, जबकि थोड़े बड़े बच्चों के लिए होम बेस्ड यंग चाइल्ड केयर के तहत 7 लाख 1 हजार 966 से अधिक बच्चों की मॉनिटरिंग की गई है.
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पीएलए बैठकों से आ रहा सामाजिक बदलाव
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कम्युनिटी स्तर पर 10 लाख 18 हजार 684 से अधिक पार्टिसिपेटरी लर्निंग एंड एक्शन (पीएलए) बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. ये बैठकें ग्रामीण महिलाओं को उनके स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति सजग बना रही हैं.
