विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: रांची सिविल कोर्ट ने रांची के चर्चित ऑटोमोबाइल कारोबारी पुनीत पीड़ा और अवध पोद्दार और प्रेमसंस मोटर के सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार और जनरल मैनेजर लिंगराज पट्टाजोशी को गिरफ्तारी से राहत तो दे दी है लेकिन सभी आरोपियों को आदेश की तारीख से 28 दिनों के भीतर निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) के समक्ष आत्मसमर्पण करने और सभी आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके भरने होंगे. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपियों को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करना अनिवार्य होगा.
प्रेमसंस मोटर्स ने आरोपों को बताया निराधार
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रांची सिविल कोर्ट के वकील विवेक कुमार आर्य के आवेदन पर चुटिया थाने में उक्त सभी आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई. प्राथमिकी में की गई शिकाय के मुताबिक विवेक के भाई दयानंद कुमार ने अपनी पुरानी कार एक्सचेंज करके नई ग्रैंड विटारा कार बुक की थी. कार की कुल कीमत 13,59,091 रुपये तय हुई थी जिसमें से 90,000 रुपये डिस्काउंट और एक्सचेंज वैल्यू काटकर अंतिम बिलिंग 12,69,091 रुपये की गई. शिकायतकर्ता का आरोप था कि कार का रजिस्ट्रेशन उनकी जानकारी के बिना कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कंपनी द्वारा की जा रही कुछ वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया तो 19 अप्रैल 2025 को ई-मेल भेजकर उनकी बुकिंग रद्द कर दी गई.
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कोटेशन और टैक्स इनवॉइस में बड़ा अंतर नहीं मिला
वहीं प्रेमसंस के अधिकारियो का कहना था कि शिकायतकर्ता ने कार खरीदने के बाद तय समय सीमा (15 दिन) के अंदर बची राशि (1,70,000 रुपये) का भुगतान नहीं किया. बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी भुगतान न होने और कार की डिलीवरी न लेने के कारण नियमानुसार बुकिंग रद्द की गई. इसके बाद ग्राहक को उनका दिया गया पैसा और उनकी पुरानी गाड़ी वापस लौटा दी गई थी. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि कंपनी की छवि खराब करने के इरादे से यह झूठा मामला दर्ज कराया गया है और यदि कोई विवाद था भी तो इसे कंज्यूमर फोरम में ले जाया जाना चाहिए था. सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता को दी गई कोटेशन और टैक्स इनवॉइस की अंतिम कीमतों में कोई बड़ा अंतर नहीं था केवल TCS गणना के कारण मात्र 950 रुपये का अंतर था.
