राज्यसभा चुनाव : आजसू को सुदेश के फैसले का इंतजार, विधायक तिवारी महतो ने कहा कि मैं प्रस्तावक नहीं बना हूं

Ranchi : झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नामांकन के साथ ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है....

Ranchi : झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नामांकन के साथ ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है. सत्ताधारी गठबंधन जहां एकजुटता का प्रदर्शन कर अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की एंट्री और आजसू के रुख ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है. आंकड़ों के इस खेल में अब हर एक वोट की कीमत बढ़ गई है. जिससे सूबे का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है. इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच आजसू का रुख अभी भी वेट एंड वॉच वाला बना हुआ है. आजसू विधायक तिवारी महतो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अभी किसी भी प्रत्याशी के प्रस्तावक नहीं बने हैं. अभी तक पार्टी का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आया है. पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो का जो भी निर्देश आएगा, हम उसी का पालन करेंगे और पूरी पार्टी एकजुट होकर उनके फैसले के साथ चलेगी. आजसू का यह रुख संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में पर्दे के पीछे की सियासत और तेज होने वाली है.

गठबंधन एकजुट, हेमंत की लोकप्रियता के आगे भाजपा में साहस नहीं : सुदिव्य सोनू

नामांकन के दौरान सत्ताधारी गठबंधन ने अपनी ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया. झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य सोनू ने गठबंधन की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए कहा कि नामांकन के समय जिस तरह से गठबंधन के सभी सदस्यों की उपस्थिति रही, वह साफ तौर पर हमारी मजबूती को बयां करती है. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी पर तंज कसते हुए कहा कि नामांकन के वक्त उनके समर्थित विधायकों की उपस्थिति काफी कम थी. जो उनकी कमजोर स्थिति को दिखाता है. सोनू ने भाजपा पर भी सीधा हमला बोला और कहा कि हेमंत सोरेन की लोकप्रियता के सामने भाजपा में इतना साहस ही नहीं है कि वे अपना उम्मीदवार मैदान में उतार सकें.

हॉर्स ट्रेडिंग की जरूरत नहीं, मेरा काम बोलेगा परिमल नाथवानी

लगातार लग रहे कयासों और जोड़-तोड़ के आरोपों के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी दावेदारी पेश की. उन्होंने विरोधियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 2014 में भी मैं निर्दलीय के तौर पर ही आया था और इस बार भी इंडिपेंडेंट ही आया हूं. मुझे किसी हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की आवश्यकता नहीं है. मेरा काम खुद बोलेगा. नाथवानी ने झारखंड से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि झारखंड उनकी कर्मभूमि है और उन्होंने यहां अपने जीवन के 12 साल बिताएं हैं, इसलिए उन्हें राज्य के विकास के लिए विधायकों के समर्थन का पूरा भरोसा है.

 

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