Ranchi: झारखंड की सियासत में इन दिनों एक नया राजनीतिक ‘चमत्कार’ आकार लेने की कोशिश कर रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार यादव उर्फ रवि पीटर ने सीधे देश के सबसे ऊंचे सदन यानी राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र खरीद लिया है. अब चुनौती बस इतनी सी है कि उन्हें प्रस्तावक के रूप में 9 विधायकों के हस्ताक्षर चाहिए, और इसी मिशन इम्पॉसिबल को मुमकिन बनाने के लिए पीटर विधायकों के दरवाजे-दरवाजे दस्तक दे रहे हैं.

राजद से की शुरुआत
इसी कड़ी में शनिवार को वह राजद विधायक संजय यादव और सुरेश पासवान के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे और उनसे समर्थन की मांग की. वैसे, रवि पीटर का हौसला देखने लायक है. उनके पास खोने को कुछ नहीं है, लेकिन पाने के लिए पूरी राज्यसभा की सीट है. राजद के बाद अब उनका अगला पड़ाव झामुमो, कांग्रेस और धुर विरोधी भाजपा के विधायक होने वाले हैं. देखना दिलचस्प होगा कि धुर विरोधी विचारधाराओं वाले दल रवि पीटर के इस ‘निर्दलीय प्रेम’ पर पिघलते हैं या नहीं.
नथवानी मॉडल का जिक्र
सबसे मजेदार बात यह है कि रवि पीटर ने अभी से अपनी तुलना पूर्व सांसद परिमल नथवानी से कर डाली है. उन्होंने कसम खाई है कि अगर वह किसी चमत्कार से जीत गए, तो नथवानी की तर्ज पर ही जनता की सेवा करेंगे. उन्होंने नथवानी को ‘क्लीन चिट’ देते हुए कहा कि उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सकता. उन्होंने झारखंड को सिर्फ दिया है.
बड़ा विजन, कठिन गणित
जल, जंगल, जमीन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का झंडा बुलंद करने का दावा करने वाले रवि पीटर के पास फिलहाल विजन तो बड़ा है, लेकिन अंकगणित शून्य है. अब देखना यह है कि 9 विधायकों का दिल पिघलता है या रवि पीटर का यह राज्यसभा सफर सिर्फ एक ‘फॉर्म’ खरीदने और अखबारों की सुर्खियां बटोरने तक ही सिमट कर रह जाता है.
