Ranchi: राजधानी के साइबर स्पेस और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर जालसाज बुजुर्गों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं. हरमू हाउसिंग कॉलोनी (वर्धमान ए-15) के रहने वाले 85 वर्षीय रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एम.पी. अजमेरा के साथ लैप्स इंश्योरेंस पॉलिसी को पुनर्जीवित (रिवाइवल) करने के नाम पर 1.04 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है.
जालसाज ‘किरण जैन’ ने बुना झांसा
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, यह धोखाधड़ी 29 दिसंबर 2025 से 30 मार्च 2026 के बीच अंजाम दी गई. पीड़ित एम.पी. अजमेरा ने बताया कि बीते साल 29 दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक अंजान नंबर से मैसेज और कॉल आया. कॉल करने वाली महिला ने अपना नाम ‘किरण जैन’ बताया. उसने बुजुर्ग को झांसा दिया कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस की उनकी एक पॉलिसी लैप्स हो चुकी है.

महिला ने बुजुर्ग को विश्वास दिलाया कि यदि वे इस पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू (पॉलिसी बंद करने पर मिलने वाली राशि) का क्लेम करना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लॉक-इन पीरियड को पूरा करने के लिए 50-50 हजार रुपये के दो पेंडिंग प्रीमियम जमा करने होंगे.
बैंक खाते में ट्रांसफर कराए एक लाख से अधिक रुपये
जालसाज के झांसे में आकर बुजुर्ग अपनी रकम निकालने के लिए तैयार हो गए. इसके बाद 15 जनवरी 2026 को आरोपी महिला ने व्हाट्सएप के जरिए मुंबई स्थित यस बैंक के एक खाते का विवरण भेजा और उसमें 1.04 लाख रुपये जमा करने को कहा. बुजुर्ग ने इसे पूरी तरह सच मानते हुए अगले ही दिन यानी 16 जनवरी 2026 को एनईएफटी (NEFT) के माध्यम से पूरी राशि ट्रांसफर कर दी.
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दोबारा पैसे मांगे जाने पर खुला राज
ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. आरोपियों ने बुजुर्ग को उलझाए रखने के लिए दो अन्य व्हाट्सएप नंबरों से भी संपर्क जारी रखा. इसके बाद जब 30 मार्च 2026 को सरेंडर वैल्यू की राशि रिलीज होने का समय आया, तो जालसाजों ने बुजुर्ग से ‘अतिरिक्त प्रक्रिया शुल्क’ के नाम पर 1.10 लाख रुपये और जमा करने की मांग कर दी.
दोबारा बड़ी रकम मांगे जाने पर बुजुर्ग को शक हुआ. उन्होंने जब अपने स्तर से जांच-पड़ताल की, तो पता चला कि वे साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस चुके हैं और अब वे सभी मोबाइल नंबर भी बंद आ रहे हैं.
बैंक खाते फ्रीज करने की कवायद शुरू
ठगी के शिकार बुजुर्ग ने थक-हारकर साइबर क्राइम थाना, रांची में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दो खातों को फ्रीज करने की कवायद शुरू कर दी है.
DSP के निर्देश पर जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची साइबर थाना प्रभारी डीएसपी श्रीनिवास सिंह के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने और धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए यस बैंक खाते को तुरंत फ्रीज कराने की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है, ताकि बुजुर्ग की डूबी रकम को रिकवर किया जा सके.
