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सरायकेला: हूल दिवस पर आजसू ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि, हरेलाल महतो ने कहा – युवा पीढ़ी को बताएं क्रांति का इतिहास

Saraikela : हूल क्रांति के नायकों को याद करते हुए आजसू पार्टी ने मंगलवार को अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो...

सरायकेला: हूल दिवस

Saraikela : हूल क्रांति के नायकों को याद करते हुए आजसू पार्टी ने मंगलवार को अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की. चांडिल के चिलगु स्थित आजसू पार्टी के प्रधान कार्यालय में केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यकर्ताओं ने शहीद सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर नमन किया. साथ ही अंग्रेजी हुकूमत, ज़मीदारों के शोषण और अन्याय के विरुद्ध सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने जो साहस दिखाया, वह अतुलनीय है. भारत की आजादी की लड़ाई में झारखंड के वीर सपूतों का योगदान प्रेरणादायी रहा है. आज की युवा पीढ़ी को हूल क्रांति के इतिहास से अवगत कराना जरूरी है, ताकि उनके बलिदान को कभी भुलाया न जा सके.

अंग्रेजी शासन ने नींव हिला दी

हरेलाल महतो ने कहा कि 1855 में भोगनाडीह से शुरू हुई हूल क्रांति ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी. यह सिर्फ विद्रोह नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान की लड़ाई थी. कार्यक्रम में पूर्व चांडिल प्रमुख अमला मुर्मू, भीम महापात्र, देवराज महतो, हिमेश महतो समेत बड़ी संख्या में आजसू कार्यकर्ता मौजूद रहे. सभी ने शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया. 30 जून को हर साल हूल दिवस के रूप में मनाया जाता है. सिदो-कान्हू ने 30 जून 1855 को हजारों संथालों के साथ भोगनाडीह में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. आजसू पार्टी ने इस दिन को यादगार बनाते हुए नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की अपील की.

 

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