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मैथन डैम से लाए गए 76 चीतल, ग्रामीणों का आरोप– शिकार के कारण घट रही संख्या
Saraikela: दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में जैव-विविधता बढ़ाने के लिए बोकारो के मैथन डैम स्थित हिरण पार्क से दो चरणों में लाए गए 76 चीतल हिरणों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि खुले जंगल में छोड़ने के बाद कई हिरणों का शिकार कर लिया गया है, जबकि वन विभाग के पास हिरणों की अद्यतन स्थिति की जानकारी नहीं है. वन विभाग द्वारा मैथन डैम हिरण पार्क से 76 चीतल हिरणों को लाकर पहले छोटका बांध के चारों ओर तार से घेराबंदी कर कुछ दिन रखा गया था. इसके बाद सभी हिरणों को दलमा सेंचुरी के खुले जंगल में छोड़ दिया गया. विभाग का उद्देश्य सेंचुरी में चीतल की संख्या बढ़ाना और पर्यटन को बढ़ावा देना था.

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हिरणों का हो रहा शिकार
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जंगल में छोड़े जाने के बाद हिरण झुंड से अलग होकर तराई के गांवों तक पहुंचने लगे. आरोप है कि कुछ लोगों ने हिरणों का शिकार किया. वहीं, आवारा कुत्तों द्वारा खदेड़कर मारे जाने की भी घटनाएं सामने आई हैं. शुक्रवार रात एक चीतल जंगल से भटक कर टाटा-रांची NH-33 स्थित वन पलाशी होटल परिसर में पहुंच गया. होटल के संचालक बुद्धेश्वर माडी ने बताया, “रात में अचानक हिरण होटल के ग्राउंड में घूमता दिखा. वह इधर-उधर कूदा और फिर हांसदा की ओर जंगल में भाग गया. रात होने के कारण पता नहीं चल पाया कि हिरण किस दिशा में गया.” होटल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
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वन विभाग पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि हिरणों को छोड़ने के बाद आज तक किसी भी पदाधिकारी ने यह जानकारी साझा नहीं की कि अब कुल कितने हिरण जीवित हैं. अगर एक हिरण होटल तक पहुंच सकता है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी हिरणों का क्या हाल होगा. कहीं उनका शिकार तो नहीं हो गया? – यह चर्चा का विषय बना हुआ है. इस संबंध में दलमा रेंज के सूत्र से पता चला “सभी 76 चीतल को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही खुले में छोड़ा गया था. जंगल इनका प्राकृतिक आवास है. हिरणों की मॉनिटरिंग के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. भटक कर आबादी में आने की घटनाएं कभी-कभी होती हैं. शिकार की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी.” हालांकि, अधिकारी यह नहीं बता पाए कि वर्तमान में कितने चीतल जीवित हैं.
ग्रामीणों की मांग
1. छोड़े गए सभी चीतल हिरणों की गणना कर सूची सार्वजनिक की जाए.
2. सेंचुरी की सीमा पर गश्ती बढ़ाई जाए और गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए.
3. शिकार में लिप्त लोगों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो.
4. भटक कर आबादी में आने वाले हिरणों के रेस्क्यू के लिए त्वरित टीम गठित हो.
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बिना ठोस सुरक्षा योजना के हिरणों को खुले में छोड़ना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा है.
