Saraiekla: दलमा पहाड़ क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सत्यानारायण मुर्मू ने कड़ा विरोध जताया है. हाड़ात गांव में मां-बेटी की मौत के बाद उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया.
डॉ. मुर्मू ने कहा कि आज आम आदमी अपनी जान बचाने के लिए जूझ रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग पूरी तरह मौन बने हुए हैं. घटना की सूचना मिलने के बावजूद सरायकेला डीएफओ सवा आलम अंसारी और चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे, जनता जानना चाहती है. क्या वनपाल और वनरक्षी को ही जिम्मेदार बनाकर सोफा सौंप दिया गया है?

कॉरिडोर पर अतिक्रमण सबसे बड़ी वजह:
उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर समस्या की जड़ में वन विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही है. क्षेत्र के तराई इलाकों में अवैध मिनी शराब भट्टियों का संचालन, बड़े होटल, पार्किंग और निजी कंपनियों का तेजी से फैलता कब्जा खुलेआम जारी है, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.

“मुख्य रास्तों पर ही कब्जा”
डॉ. मुर्मू ने कहा कि स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब हाथी कॉरिडोर के मुख्य रास्तों पर ही अतिक्रमण कर दिया जाता है, जिससे हाथियों का प्राकृतिक आवागमन बाधित हो रहा है. नतीजतन हाथी गांवों की ओर आने को मजबूर हैं और इसका खामियाजा निर्दोष ग्रामीण अपनी जान देकर चुका रहे हैं.

ALSO READ:
प्रशासन पर सीधा सवाल:झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज : 26 अप्रैल से गर्मी से राहत, कई जिलों में ओलावृष्टि और वज्रपात का अलर्ट
उन्होंने प्रशासन पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि हर घटना के बाद सिर्फ मुआवजा बांटकर कर्तव्य पूरा कर लिया जाता है. _”लेकिन हाथियों को रोकने, कॉरिडोर बहाल करने और दलमा में पानी-भोजन की व्यवस्था पर कोई स्थायी योजना क्यों नहीं बनती? क्या ग्रामीणों की जान की कोई कीमत नहीं?”
डॉ. मुर्मू ने मांग की कि कॉरिडोर से सभी अवैध कब्जे तुरंत हटाए जाएं, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और हाथी प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग लगाई जाए, वरना आंदोलन होगा.
