Click Here
Click Here
Click Here

16वें वित्त आयोग के समक्ष झारखंड की सशक्त पैरवी: अगले पांच साल में झारखंड को मिलेगा 14,231 करोड़ अनुदान

Ranchi: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग...

Ranchi: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान राज्य के पंचायती राज ढांचे के भविष्य को लेकर एक दूरदर्शी और तार्किक खाका प्रस्तुत किया है. इस दौरान उन्होंने केवल राशि की मांग नहीं की, बल्कि राज्य की जमीनी हकीकत के अनुरूप एक न्यायपूर्ण और व्यावहारिक वित्तीय मॉडल की वकालत की.

14,231 करोड़ का वित्तीय विजन, विकास को मिलेगी नई गति

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने खुलासा किया कि आगामी वर्षों (2026-27 से 2030-31) के दौरान झारखंड को केंद्रीय अनुदान के रूप में लगभग 14,231 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आवंटन का ढांचा बेहद संतुलित है, जिसमें 11,385 करोड़ रुपये बेसिक ग्रांट के रूप में और 2,846 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में निर्धारित किए गए हैं, यह राशि न केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायक होगी, बल्कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी.

केंद्र के समक्ष व्यावहारिक चुनौतियां और ठोस मांगें

  • बकाया राशि का त्वरित भुगतान: मंत्री ने 15वें वित्त आयोग के तहत लंबित धनराशि का जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने का पुरजोर आग्रह किया, ताकि वर्तमान में चल रही विकास परियोजनाओं की गति बनी रहे.
  • परफॉर्मेंस ग्रांट में उदारता की आवश्यकता: उन्होंने तर्क दिया कि झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न किंतु सामाजिक-आर्थिक रूप से विकासशील राज्यों की ‘सीमित राजस्व क्षमता’ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. परफॉर्मेंस ग्रांट तय करते समय आयोग को कठोर मानकों के बजाय राज्य की वास्तविक स्थितियों के प्रति उदार और लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि पिछड़ते क्षेत्रों को दंडित होने के बजाय आगे बढ़ने का अवसर मिले.
  • डिजिटल पंचायत और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: आधुनिक तकनीक के युग में ‘डिजिटल पंचायत’ के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने सहायक सचिवों के मानदेय में वृद्धि और प्रशासनिक व्यय के लिए एक अलग और पर्याप्त बजट की मांग की. उनका मानना है कि जब तक पंचायतों का प्रशासनिक अमला आर्थिक रूप से संतुष्ट और सक्षम नहीं होगा, तब तक शासन की अंतिम कड़ी तक सुशासन का लाभ पहुंचाना कठिन है.

Read Also: असामाजिक तत्वों ने क्रांतिवीर रघुनाथ महतो की प्रतिमा को किया खंडित, जांच में जुटी पुलिस 

आत्मनिर्भर पंचायतों का संकल्प

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का यह दृष्टिकोण केवल बजट आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंचायतों को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का जीवंत केंद्र बनाने की इच्छाशक्ति को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग जनसेवा को डिजिटल बनाने और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर ठोस विकास कार्यों को अंजाम देने में किया जाएगा.झारखंड की इस पहल ने यह संकेत दे दिया है कि राज्य अब केंद्रीय अनुदानों पर केवल निर्भर रहने के बजाय, अपनी विशिष्टताओं के आधार पर अपने हितों की रक्षा करने और अपने विकास के मानकों को खुद तय करने के लिए तत्पर है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *