Simdega: जिले के बीरू-बिरकेरा क्षेत्र में नदी पर बना जर्जर पुल धंसने के बाद आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. पुल के क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. मजबूरी में ग्रामीणों ने लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया है, जिसकी स्थिति भी बेहद खतरनाक बताई जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है.
ग्रामीणों और छात्रों की बढ़ी परेशानी
मुख्य पुल के धंसने से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, कॉलेज के विद्यार्थियों और ग्रामीणों को हो रही है. रोजमर्रा के काम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर अस्थायी पुल से आवाजाही करनी पड़ रही है.


प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
आदिवासी छात्र संघ, सिमडेगा के महासचिव अमन नियेल सोरेंग ने संघ के पदाधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों और छात्रों की समस्याएं सुनीं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीण पहले ही जिला प्रशासन को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से पुल का जल्द पुनर्निर्माण कराने की मांग की.
उग्र आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई, तो ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं और युवाओं के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा. संघ का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
संघ की प्रमुख मांगें
संघ ने सरकार से धंसे पुल का युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण, सुरक्षित अस्थायी डायवर्जन की व्यवस्था, मामले की तकनीकी जांच तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं.
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