Ranchi: झारखंड में पेसा नियमावली कागजी दस्तावेज तक सीमित रहने के बजाय धरातल पर नजर आएगा. राज्य के गांव-पंचायत तक पेसा नियमावली को मजबूती से लागू करने के लिए सरकार के सभी विभाग संयुक्त रूप से जोर लगाएंगे. इसके साथ ही राज्य में पेसा कॉर्डिनेशन कमिटी का गठन प्रदेश से लेकर प्रखंड स्तर पर किया जाएगा, ताकि इसकी लगातार समीक्षा और अड़चनों का समय सीमा के अंदर निदान हो सके. इन बातों को झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने बीएनआर होटल में राज्य स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा.
राज्य में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने और अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी स्वशासन की स्थापना के उद्देश्य से राज्य स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था. इस कॉन्फ्रेंस में नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य के राजू, विभागीय सचिव मनोज कुमार, निदेशक राजेश्वरी बी सहित विभागीय एवं सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि मुख्य रूप से मौजूद रहे.
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झारखंड का पेसा नियमावली देश का मॉडल साबित
इस मौके पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पेसा नियमावली आदिवासी क्षेत्र की व्यापक मांग को पूर्ण करता है. आने वाले समय में झारखंड का पेसा नियमावली देश का मॉडल साबित हो, इस दिशा में काम किया जा रहा है. सहायक सचिव के पद पर पहली बार महिलाओं को प्राथमिकता दिया जाना, ग्राम सभा में आधी आबादी के अधिकार को मजबूती प्रदान करता है.
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जब पेसा नियमवाली का प्रस्ताव कैबिनेट में आने वाला था तब उन्हें रात भर नींद नहीं आई. उनके मन में बस एक ही सवाल था कि एक समुदाय के साथ न्याय करना है. दृढ़ इच्छा शक्ति और पेसा नियमवाली को लेकर ज्यादा से ज्यादा विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया गया. उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में गैर आदिवासी प्रधान का मामला विभाग के संज्ञान में है. इस मामले में सरकार अपने स्तर पर पहल करेगी.
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अभी और प्रयास की जरूरत
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पेसा नियमावली का लाभ कैसे ज्यादा से ज्यादा अनुसूचित क्षेत्र के लोगों को मिले, इसके लिए सभी को प्रयास करना होगा. इस नियमावली के तहत ग्राम सभा को मिलने वाले अधिकार को जानना-समझना और उसे पाने के लिए सकारात्मक पहल करना हम सभी की जवाबदेही है.
देश का सबसे बेहतरीन नियमावली: के राजू
राज्यस्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य के राजू ने कहा कि झारखंड का पेसा नियमावली देश का सबसे बेहतर नियमावली है. ये बात राष्ट्रीय स्तर के नीति निर्धारण और नियमावली का अध्ययन करने वाले भी मान चुके हैं. उन्होंने कहा कि बेहतर नियमावली को धरातल पर उतारने के लिए अब हम सभी को अपनी-अपनी भूमिका अदा करनी होगी.
देश के दूसरे राज्यों में जहां पेसा नियमवाली बने हैं, वहां वो प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सके हैं. झारखंड को इस मिथक को तोड़ते हुए इस नियमावली से अनुसूचित क्षेत्र के अधिकार को संरक्षित करने के साथ उन्हें प्रभावी बनाना है. हमारा उद्देश्य पॉवर को सेंट्रलाइज रखना नहीं, बल्कि डिसेंट्रलाइज करना है. के राजू ने कहा कि पेसा नियमावली सिर्फ पंचायती राज विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मजबूती प्रदान करने में सरकार के सभी विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है.
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नियमावली मील का पत्थर: सचिव
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने कहा कि ये नियमावली गांव के बदलाव और उसके हक-अधिकार के लिए मील का पत्थर साबित होगा. विभाग इस नियमावली को स्थानीय भाषा में भी गांव के लोगों को उपलब्ध करा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस नियमावली से मिलने वाले अधिकार को जान सकें.
उन्होंने कहा कि नियमवाली की जानकारी के लिए प्रशिक्षण से लेकर वृहद प्रचार-प्रसार भी चलाया जा रहा है. कॉन्फ्रेंस को पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी ने संबोधित करते हुए कहा कि इस नियमवाली को तैयार करने से पहले दो बार डेढ़-डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की आपत्तियों को विभाग ने ग्रहण किया है. कई आपत्तियों को नियमवाली में उचित जगह भी दी गई है. विभाग आगे भी लोगों के सुझाव को ग्रहण करने के लिए हमेशा तैयार है.
राज्यस्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का संचालन सुधीर पाल, दयामनी बारला, राम चंद्र उड़ान, एलिना होरो, पूर्णिमा मुखर्जी, शीला मतंग, विनोद सिंह, शैलेन्द्र सिंह, शाजिद, सलोनी, ईशा मिश्रा, शुभकांता सहित अलग-अलग विभाग के अधिकारी और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
