मानव तस्करी और लापता बच्चों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति ने बुलाई जोनल बैठक, झारखंड CID ने SP -SSP से मांगे आंकड़े

Ranchi: देश में मानव तस्करी और लापता बच्चों की गंभीर होती समस्या पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट बेहद सख्त रुख...

मानव तस्करी और लापता बच्चों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति ने बुलाई जोनल बैठक, झारखंड CID ने SP -SSP से मांगे आंकड़े

Ranchi: देश में मानव तस्करी और लापता बच्चों की गंभीर होती समस्या पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट बेहद सख्त रुख अख्तियार किए हुए है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित केंद्रीय गृह मंत्रालय की विशेष समिति ने आगामी आगामी 25 जुलाई को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण जोनल कंसल्टेशन मीटिंग (पूर्वी क्षेत्र) बुलाई है. इस बैठक में झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की भागीदारी तय की गई है. इस उच्च स्तरीय बैठक की तैयारियों के मद्देनजर झारखंड के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने राज्य के सभी एसएसपी और एसपी को निर्देश के पत्र जारी कर एक सप्ताह के भीतर मानव तस्करी से जुड़े कड़े और विस्तृत आंकड़े जमा करने का सख्त निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयार हो रही है एसओपी

जानकारी के अनुसार, माननीय सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका एसएलपी (Crl.) No. 11263/2025 (जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य व अन्य) के आलोक में लापता बच्चों और मानव तस्करी पर एक देशव्यापी एसओपी तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसी समिति द्वारा पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के साथ विचार-विमर्श के लिए 25 जुलाई को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक नई दिल्ली में बैठक निर्धारित की गई है. बैठक का मुख्य उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों में मौजूदा व्यवस्थाओं, चुनौतियों, अंतर्विभागीय समन्वय और राज्यों द्वारा अपनाए जा रहे सर्वोत्तम तौर-तरीकों की समीक्षा कर इनपुट्स हासिल करना है.

सीआईडी ने फॉर्मेट में मांगी जानकारी, उच्च प्राथमिकता देने का निर्देश

झारखंड सीआईडी के पुलिस अधीक्षक ने सभी जिलों के कप्तानों को भेजे गए पत्र के जरिए स्पष्ट किया है कि इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए पुख्ता आंकड़े और सूचनाएं बेहद जरूरी हैं. पुलिस मुख्यालय ने इसे उच्च प्राथमिकता देने को कहा है और एक निर्धारित फॉर्म में पिछले दो वर्षों (2024, 2025 और मई 2026 तक) का पूरा डेटा मांगा है.

इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मांगी गई है रिपोर्ट

  • – राज्य में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स के कामकाज, उनकी संख्या और वहां तैनात स्टाफ (इंस्पेक्टर, एसआई, एएसआई, कांस्टेबल) का पूरा विवरण.
  • – पिछले दो वर्षों में दर्ज किए गए बाल तस्करी के मामले और रेस्क्यू और बरामद किए गए बच्चों की संख्या.
  • – लापता बच्चों को लेकर जिलों में गठित टास्क फोर्स की वर्तमान स्थिति, उनकी संरचना और पिछले दो साल में उनके द्वारा किए गए कार्यों का ब्योरा.
  • – बच्चों की खोजबीन, रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए जिला स्तर पर अपनाई गई कोई भी आधुनिक तकनीक या सफल रणनीतियां.
  • – लापता बच्चों और मानव तस्करी को रोकने में विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय में आने वाली दिक्कतें और एएचटीयू को बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुझाव.

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