Ranchi: तेतुलिया की 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि को कागजों पर निजी संपत्ति बनाने के खेल में फंसे आरोपी महेंद्र सोरेन के लिए कानूनी रास्ते अब पूरी तरह बंद हो चुके हैं. झारखंड हाई कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है. महेंद्र सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने इस सिंडिकेट के साथ मिलकर सरकारी खजाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है.
सीआईडी का कसता शिकंजा
मामले के मुख्य मास्टरमाइंड शैलेश सिंह को जांच एजेंसी पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. अब जांच की सुई महेंद्र सोरेन, इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन जैसे सहयोगियों पर टिकी है, जिन्होंने फर्जी कागजात तैयार करने और साजिश को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
यह भी पढ़ें: झारखंड के विकास पथ पर नई रेल-रफ्तार: पिस्का और मुरी स्टेशन बने आधुनिकता के नए प्रतीक, पीएम मोदी ने किया लोकापर्ण
क्या है आरोप?
• रिकॉर्ड्स में हेरफेर: वन विभाग और अंचल कार्यालय के सरकारी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर जालसाजी की गई.
• फर्जी दस्तावेजों का खेल: साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए नकली डीड और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लिया गया.
• जंगल को बनाया निजी जागीर: करीब 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि को मिलीभगत के जरिए निजी घोषित करवाकर बेच दिया गया.
यह भी पढ़ें: RDCA जांच पर उठे नए सवाल, कार्रवाई सिर्फ दो पदाधिकारियों तक क्यों सीमित? अन्य नामों पर चुप्पी
