Bokaro : डीवीसी के विभिन्न अस्पतालों और परियोजनाओं में साल 2012 से अपनी सेवाएं दे रहे 42 पैरामेडिकल स्टाफ की नौकरी खतरे में है. करीब 14 वर्षों तक पूरी निष्ठा से कार्य करने के बाद अब डीवीसी प्रबंधन इन अनुभवी कर्मचारियों को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) परीक्षा के माध्यम से हटाने पर विचार कर रहा है. प्रबंधन के इस अप्रत्याशित रुख के कारण इन कर्मचारियों के सामने अचानक रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. वर्तमान में इन सभी कर्मियों की उम्र 45 से 55 वर्ष के बीच हो चुकी है. जिसके कारण इस मोड़ पर नौकरी जाने से उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई सहित पूरे परिवार की जिम्मेदारियां पूरी तरह प्रभावित होने की कगार पर पहुंच गई हैं.

इंटरव्यू के माध्यम से हुई थी बहाली
प्रबंधन के इस निर्णय से कर्मचारी इस हद तक मानसिक तनाव में हैं कि वे आत्मघाती कदम उठाने तक की बात कर रहे हैं. इन पीड़ित कर्मचारियों की बहाली वर्ष 2012 में एक इंटरव्यू प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी. इसके साथ ही केंद्रीय महंगाई भत्ते (सीडीए) और बेसिक पे के साथ बहाली की गई थी. लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2015 में प्रबंधन ने मनमाने तरीके से उनका केंद्रीय महंगाई भत्ता बंद कर दिया. इसके बावजूद कर्मचारी काम करते रहे और वर्ष 2012 से 2018 तक हर साल उनकी सेवा का विस्तार किया जाता रहा. इसके बाद वर्ष 2019 में प्रबंधन ने फिर से मनमानी करते हुए इनका दोबारा इंटरव्यू लिया और तीन साल तक हर वर्ष सेवा विस्तार दिया. इसके बाद फिर वर्ष 2022 में इंटरव्यू के जरिए इन्हें तीन साल के लिए सेवा में रखा गया. अब जब वर्ष 2025-26 में इनकी सेवा अवधि पूरी हो रही है. तो प्रबंधन सीबीटी परीक्षा के नाम पर इन पुराने अनुभवी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की मनसा पाले हुए है.
कैंसर से जुझ रही एक कर्मी
प्रबंधन के इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित 42 कर्मचारियों में शामिल एक एक्स-रे तकनीशियन नूरजहां बानो है. बानों को कैंसर है. जिसका इलाज वेल्लोर में चल रहा है. कर्मचारियों ने कहा कि कोविड के समय भी कर्मचरियों ने स्वास्थय सेवाएं दी. प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों के एक शिष्टमंडल ने डीवीसी मजदूर संघ के अध्यक्ष अर्घा बसु और महामंत्री तपन कुमार दास से मुलाकात कर अपनी पूरी व्यथा सुनाई. मामले की गंभीरता को देखते हुए महामंत्री तपन दास ने तुरंत डीवीसी प्रबंधन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया है और कामगारों के पक्ष में जल्द से जल्द सहानुभूतिपूर्वक सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है.
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